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महाराष्ट्र में एक बार फिर BJP के सामने शिंदे की सेना, 'मुंबई बैंक' चुनाव में आमने-सामने की होगी टक्कर

 Reported By: Sachin Chaudhary Written By: Amar Deep
 Published : Aug 31, 2026 11:07 am IST,  Updated : Aug 31, 2026 11:07 am IST

महाराष्ट्र में एक बार फिर से बीजेपी और शिंदे की शिवसेना के बीच आमने-सामने की टक्कर हो सकती है। मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक (MDCCB) में शिंदे की शिवसेना पूरी ताकत से उतरने की तैयारी कर रही है, जहां बीजेपी का दबदबा माना जाता है। ऐसे में दोनों दल आमने-सामने आ सकते हैं।

महाराष्ट्र में फिर आमने-सामने होगी बीजेपी-शिवसेना।- India TV Hindi
महाराष्ट्र में फिर आमने-सामने होगी बीजेपी-शिवसेना। Image Source : PTI

महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार में अब सहकारिता क्षेत्र की सत्ता को लेकर नया सियासी मोड़ आ गया है। जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र में बीजेपी और शिवसेना भले की एक साथ मिलकर सरकार चला रही हैं, लेकिन  मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव में यह समीकरण बदलने वाला है। दरअसल, अभी तक इस चुनाव में बीजेपी का दबदबा माना जाता है, लेकिन अब शिंदे की शिवसेना भी इस चुनाव में उतरने वाली है। ऐसे में एक बार फिर बीजेपी और शिवसेना आमने-सामने हो सकती हैं।

बीजपी के सामने शिंदे की चुनौती

दरअसल, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दबदबे वाले मुंबई जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक (MDCCB) के चुनाव में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना पूरी ताकत से उतरने जा रही है। ठाणे-पालघर जिला बैंक चुनाव में मिली कामयाबी के बाद शिंदे गुट का हौसला बढ़ा हुआ है और अब सांसद श्रीकांत शिंदे के नेतृत्व में पार्टी मुंबई के इस प्रभावशाली बैंक पर अपना दावा ठोकने की योजना बना रही है।

शिंदे सेना से सीधी चुनौती

मौजूदा वक्त में 20 निदेशकों वाले इस बैंक पर बीजेपी विधायक प्रवीण दरेकर और उनके समर्थकों का एकतरफा कब्जा है। बोर्ड में बीजेपी के प्रसाद लाड और तेजस्वी घोसालकर जैसे नेताओं के साथ-साथ ठाकरे गुट के विधायक सुनील राउत भी शामिल हैं। ऐसे में शिंदे सेना की एंट्री से बीजेपी के सालों पुराने वर्चस्व को सीधी चुनौती मिल रही है।

मध्यमवर्गीय वोट बैंक तक पहुंच

महाराष्ट्र में सहकारी बैंकों पर नियंत्रण का मतलब केवल वित्तीय अधिकार नहीं, बल्कि जमीनी राजनीति पर मजबूत पकड़ माना जाता है। करीब 10,282 करोड़ रुपये की कार्यशील पूंजी वाला मुंबई मध्यवर्ती सहकारी बैंक हर साल 600 से 700 करोड़ रुपये का होम लोन बांटता है। साथ ही, यह बैंक सरकारी कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और हाउसिंग सोसायटियों के सेल्फ-रीडेवलपमेंट के लिए भारी फंडिंग करता है। इस पर कब्जा जमाने से सीधे मुंबई के बड़े मध्यमवर्गीय वोट बैंक तक पहुंच बनती है।

सहकारिता चुनाव में लगी होड़

बता दें कि एक तरफ भले ही शिंदे और फडणवीस राज्य सरकार साथ मिलकर चला रहे हों, लेकिन आगामी बीएमसी और स्थानीय निकाय चुनावों से पहले यह जंग शुरू हो चुकी है। दोनों ही दल सहकारिता के जरिए अपना सियासी और आर्थिक जनाधार मजबूत करने की होड़ में लगे हैं।

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