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सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस: बॉम्बे हाई कोर्ट ने खारिज की 22 लोगों को बरी करने के खिलाफ याचिका, जानें पूरे विवाद के बारे में

 Reported By: Saket Rai Edited By: Subhash Kumar
 Published : May 07, 2026 01:16 pm IST,  Updated : May 07, 2026 01:43 pm IST

सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस में 22 लोगों को बरी करने के खिलाफ दायर याचिका को बॉम्बे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। आइए जानते हैं इस विवाद के बारे में सबकुछ।

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सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला। Image Source : PTI

गुजरात के बहुचर्चित 2005 के सोहराबुद्दीन अनवर हुसैन शेख एनकाउंटर मामले में आज बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फ़ैसला सामने आया है। साल 2005 के सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में सीबीआई कोर्ट द्वारा 22 लोगों को बरी करने के खिलाफ दायर याचिका को बॉम्बे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। आपको बता दें कि यह केस देश के सबसे कंट्रोवर्शियल एनकाउंटर्स में एक माना जाता है। आइए जानते हैं इस मामले के बारे में विस्तार से।

क्या है पूरा केस?

सोहराबुद्दीन शेख का कथित फेक एनकाउंटर 2005 में हुआ था। बताया जाता है कि उसके बाद उसकी पत्नी कौसर बी की भी हत्या कर दी गई थी। वहीं 2006 इस केस का मुख्य गवाह तुलसीराम प्रजापति भी एक दूसरे कथित फेक एनकाउंटर में मारा गया था। शुरुआती जांच के दौरान इस मामले की जांच गुजरात सीआईडी द्वारा की गई। बाद में यह केस CBI को सौंपा गया था। सीबीआई द्वारा सुप्रीम कोर्ट में की गयी दरख्वास्त के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सितम्बर 2012 में यह केस मुंबई ट्रांसफर कर दिया था।

साल 2013 में सोहराबुद्दीन, उसकी पत्नी कौसर बी और साथी तुलसीराम प्रजापति के मामलों को इकठ्ठा कर मुंबई की विशेष CBI अदालत में सुनवाई शुरू की गयी थी। सबूतों के अभाव के कारण 2018 में सभी आरोपियों को कोर्ट ने रिहा कर दिया था जिसके बाद इसी साल इस मामले की सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट में शुरू हुई।.सोहराबुद्दीन के भाइयों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। एनकाउंटर मामले में पुलिसकर्मियों और अन्य को बरी किए जाने के खिलाफ याचिका पर मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम ए. अंखड की पीठ ने सुनवाई के बाद आज अपना फैसला सुनाया है।

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस की पूरी टाइमलाइन

सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में उसकी पत्नी कौसर बी और इस केस के अहम गवाह तुलसीराम प्रजापति की भी हत्या कर दी गई थी। इस बहुचर्चित मामले की टाइमलाइन इस प्रकार है।

22-23 नवंबर 2005

CBI की चार्जशीट के मुताबिक, हैदराबाद से महाराष्ट्र जा रही एक बस को गुजरात ATS ने रास्ते में रोक लिया था। बस में सवार सोहराबुद्दीन शेख, उसकी पत्नी कौसर बी और तुलसीराम प्रजापति को हिरासत में लिया गया। बाद में तुलसीराम को अहमदाबाद से उदयपुर भेज दिया गया, जबकि सोहराबुद्दीन और कौसर बी को अहमदाबाद के पास स्थित दिशा फार्महाउस ले जाया गया।

26 नवंबर 2005

अहमदाबाद के विशाला सर्कल के पास गुजरात और राजस्थान पुलिस की संयुक्त टीम ने सोहराबुद्दीन शेख को एनकाउंटर में मार गिराया। पुलिस ने दावा किया था कि वह लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा आतंकी था और तत्कालीन मुख्यमंत्री की हत्या की साजिश रच रहा था। पोस्टमॉर्टम में उसके शरीर से 11 गोलियां बरामद हुई थीं।

29 नवंबर 2005

सोहराबुद्दीन की मौत के कुछ दिनों बाद उसकी पत्नी कौसर बी की भी हत्या कर दी गई। आरोप था कि फार्महाउस पर उसके साथ दुष्कर्म के बाद उसे मारकर शव जला दिया गया। हालांकि, पुलिस का कहना था कि वह भागने की कोशिश में मारी गई।

दिसंबर 2005

सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन शेख ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाया और कौसर बी के बारे में जानकारी मांगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच गुजरात CID को सौंप दी।

26-28 दिसंबर 2006

इस केस के मुख्य गवाह तुलसीराम प्रजापति को उदयपुर जेल से गुजरात-राजस्थान पुलिस अपने साथ ले गई। बाद में गुजरात-राजस्थान सीमा पर सरहद चापरी इलाके में कथित एनकाउंटर में उसकी भी मौत हो गई। पुलिस ने दावा किया कि वह हिरासत से भागने की कोशिश कर रहा था।

मुख्य ट्रायल और फैसला

21 दिसंबर 2018 को मुंबई की विशेष CBI अदालत ने मामले में आरोपी बनाए गए सभी 22 लोगों जिनमें 21 पुलिसकर्मी और एक फार्महाउस मालिक शामिल था को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष साजिश साबित करने में असफल रहा। फैसले के बाद रुबाबुद्दीन शेख ने निराशा जताई और बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2019 में हाईकोर्ट में अपील दायर की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

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