शिलॉन्ग: असम के गुवाहाटी को मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग से जोड़ने वाले उमियम-जोराबाट एक्सप्रेसवे पर लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाएं बीते कुछ महीनों में लगातार चर्चा में रही हैं। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस एक्सप्रेसवे के 60 किलोमीटर लंबे हिस्से पर पिछले 100 दिनों में 25 लोगों की जान जा चुकी है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस खूबसूरत एक्सप्रेसवे का यह 60 किलोमीटर लंबा हिस्सा अब दुर्घटनाओं का गढ़ बनता जा रहा है।
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तेज रफ्तार और शराब बनी जान की दुश्मन
मेघालय के री-भोई जिले के पुलिस अधीक्षक वी. एस. राठौड़ ने बुधवार को बताया कि अधिकतर दुर्घटनाएं तेज स्पीड से गाड़ी चलाने के कारण हुई हैं। उन्होंने कहा कि लगभग 50 प्रतिशत पीड़ित मेघालय के बाहर के हैं। तेज रफ्तार के अलावा शराब पीकर गाड़ी चलाना भी इन हादसों का एक प्रमुख कारण है। एसपी राठौड़ ने बताया कि पुलिस भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी कि NHAI के साथ लगातार संपर्क में है और राजमार्ग पर स्पीड लिमिट बोर्ड लगाने का अनुरोध किया गया है। इसके अलावा, एक्सप्रेसवे पर अब उन स्थानों पर बैरिकेड लगाने की प्लानिंग की जा रही है जहां ड्राइवर तेज गति से वाहन चलाते हैं।
हादसों को रोकने के लिए प्रशासन ने कसी कमर
एसपी राठौड़ ने बताया कि एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल करने वाले ट्रक ड्राइवरों को लेन के मुताबिक चलने की सलाह दी जा रही है तथा भारी वाहनों की सुरक्षित पार्किंग के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। द शिलांग टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, NHAI ने इस एक्सप्रेसवे के मामले में किसी भी इंजीनियरिंग की कमी से इनकार किया था और ड्राइवरों से सावधानी से गाड़ी चलाने का आग्रह किया था। अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए मशहूर इस एक्सप्रेसवे पर बढ़ती दुर्घटनाओं ने इसकी साख को खतरे में डाल दिया है। हालांकि लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन इस खूबसूरत सड़क को और सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी कदम उठाएगा। (PTI)