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असम में बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को मंजूरी, पीड़ित महिलाओं को मिलेगा मुआवजा, जानिए इसकी खासियत

 Published : Nov 09, 2025 11:13 pm IST,  Updated : Nov 09, 2025 11:13 pm IST

सीएम शर्मा ने कहा कि सरकार बहुविवाह पीड़ित महिलाओं को मुआवजा देने के लिए एक नया कोष भी बनाएगी ताकि उन्हें अपना जीवन जारी रखने में कठिनाई का सामना नहीं करना पड़े।

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हिमंत विश्व शर्मा, सीएम, असम Image Source : PTI

गुवाहाटी: असम सरकार ने बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है। इसका ऐलान खुद मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने किया। उन्होंने रविवार को कहा कि राज्य मंत्रिमंडल ने बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिसके लिए दोषियों को सात साल तक के कठोर कारावास की सजा हो सकती है। 

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मुआवजा देने के लिए एक नया कोष बनाएगी सरकार

हालांकि, छठी अनुसूची वाले क्षेत्रों के लिए कुछ अपवाद हो सकते हैं। शर्मा ने यहां मंत्रिमंडल बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार बहुविवाह पीड़ित महिलाओं को मुआवजा देने के लिए एक नया कोष भी बनाएगी ताकि उन्हें अपना जीवन जारी रखने में कठिनाई का सामना नहीं करना पड़े। 

विधानसभा में कब पेश होगा विधेयक?

उन्होंने कहा, ‘‘असम मंत्रिमंडल ने आज बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक का नाम 'असम बहुविवाह निषेध विधेयक, 2025' होगा। इसे 25 नवंबर को विधानसभा में पेश किया जाएगा।’’ 

शर्मा ने कहा कि अगर किसी आरोपी पर बहुविवाह का आरोप साबित होता है, तो उसे सात साल तक की कठोर कारावास की सजा हो सकती है। उन्होंने कहा, "हमने पीड़ित महिलाओं को मुआवज़ा देने के लिए एक कोष बनाने का भी फैसला किया है। सरकार जरूरी मामलों में आर्थिक मदद करेगी, ताकि किसी भी महिला को जिंदगी में मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़े

विधेयक के मुख्य प्रावधान:

  1. बहुविवाह को एक संज्ञेय अपराध (कॉग्निजेबल ऑफेंस) बनाया गया है, जिससे प्रशासन बिना वारंट के अपराधियों को गिरफ्तार कर सकता है।
  2. दोषी पाए जाने वालों को सात साल तक की जेल की सजा हो सकती है।
  3. पीड़ित महिलाओं को मुआवजा देने के लिए एक विशेष कोष बनाया जाएगा।
  4. यह विधेयक संविधान की छठी अनुसूची के तहत अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लोगों और क्षेत्रों को इससे छूट देता है।

विधेयक का उद्देश्य:

  1. महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना और लैंगिक समानता को बढ़ावा देना।
  2. बहुविवाह जैसी प्रथाओं को रोकना और समाज में सकारात्मक बदलाव लाना।
  3. महिलाओं को सशक्त बनाना और उनकी गरिमा की रक्षा करना।
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