1. Hindi News
  2. पैसा
  3. ऑटो
  4. भारतीय EVs के लिए स्पेन बना सबसे बड़ा बाजार, यूरोप में $2.22 करोड़ से बढ़कर $36.9 करोड़ का हुआ एक्सपोर्ट

भारतीय EVs के लिए स्पेन बना सबसे बड़ा बाजार, यूरोप में $2.22 करोड़ से बढ़कर $36.9 करोड़ का हुआ एक्सपोर्ट

 Written By: Sunil Chaurasia
 Published : Aug 17, 2026 05:07 pm IST,  Updated : Aug 17, 2026 05:07 pm IST

भारतीय इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए स्पेन सबसे बड़ा बाजार बना, जहां एक्सपोर्ट बढ़कर 146.4 मिलियन डॉलर हो गया।

indian electric cars, indian evs, made in india electric cars, indian electric cars in europe- India TV Hindi
टाटा हैरियर इलेक्ट्रिक Image Source : TATA MOTORS EV

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारतीय इलेक्ट्रिक कारों के एक्सपोर्ट के लिए यूरोप सबसे बड़े गंतव्य के रूप में उभरा है। इसके अलावा ब्रिटेन, भारतीय इलेक्ट्रिक कारों का दूसरा सबसे बड़ा बाजार बनकर उभरा है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों से ये जानकारी मिली है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत के इलेक्ट्रिक कारों के एक्सपोर्ट में भारी उछाल आया।

2.22 करोड़ डॉलर से बढ़कर 36.9 करोड़ डॉलर का हुआ एक्सपोर्ट

इस दौरान, इलेक्ट्रिक कारों से होने वाली निर्यात आय एक साल पहले के 2.22 करोड़ डॉलर से बढ़कर 36.9 करोड़ डॉलर हो गई, जबकि गाड़ियों का निर्यात 1,309 यूनिट्स से कई गुणा बढ़कर 10,802 यूनिट्स पर पहुंच गया। ये भारत के इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग की बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है। 78.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर

एक अधिकारी ने बताया कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों के निर्यात में आई ये बढ़ोतरी 'मेड इन इंडिया' इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता और सस्टेनेबल मोबिलिटी समाधानों के लिए देश के एक महत्वपूर्ण उत्पादन केंद्र के रूप में उभरने को दर्शाती है।

भारतीय इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए स्पेन बना सबसे बड़ा बाजार

भारतीय इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए स्पेन सबसे बड़ा बाजार बना, जहां एक्सपोर्ट बढ़कर 146.4 मिलियन डॉलर हो गया। ये इस कैटेगरी में भारत के कुल एक्सपोर्ट का लगभग 40 प्रतिशत था। डेटा से पता चला कि इस तिमाही के दौरान स्पेन को कुल 4,007 इलेक्ट्रिक गाड़ियां भेजी गईं, जिससे ये वैल्यू और वॉल्यूम, दोनों के हिसाब से सबसे बड़ी जगह बन गया।

ब्रिटेन ने 78.7 मिलियन डॉलर का किया इंपोर्ट

ब्रिटेन दूसरा सबसे बड़ा बाजार रहा, जहां 78.7 मिलियन डॉलर का इंपोर्ट हुआ, जबकि पिछले साल की इसी तिमाही में शिपमेंट न के बराबर था। आंकड़ों के मुताबिक, "एक्सपोर्ट वॉल्यूम सिर्फ एक गाड़ी से बढ़कर 2,646 गाड़ियां हो गई, जो यूरोप के सबसे विकसित EV बाजारों में से एक में भारत में बनी इलेक्ट्रिक कारों की बढ़ती पैठ को दिखाता है।"

यूरोप के अन्य देशों को भी बढ़ा एक्सपोर्ट

कई अन्य यूरोपीय देशों में भी भारतीय इलेक्ट्रिक गाड़ियों के इंपोर्ट में जबरदस्त ग्रोथ देखी गई। जर्मनी को एक्सपोर्ट 25.1 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया, इसके बाद नॉर्वे 21.1 मिलियन डॉलर और डेनमार्क 21 मिलियन डॉलर का स्थान रहा। बेल्जियम 12.9 मिलियन डॉलर, नीदरलैंड 12 मिलियन डॉलर, ग्रीस 3.8 मिलियन डॉलर, इटली 2.7 मिलियन डॉलर, स्वीडन 2.1 मिलियन डॉलर और पोलैंड 1.6 मिलियन डॉलर से भी मांग में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

भारत ने एशिया-पैसिफिक मार्केट में भी बढ़ाया निर्यात

यूरोप के अलावा, भारत ने एशिया-पैसिफिक मार्केट में भी अपना एक्सपोर्ट बढ़ाया है। जापान ने 13.4 मिलियन डॉलर की इलेक्ट्रिक कारें इम्पोर्ट कीं, जबकि इजराइल 2.8 मिलियन डॉलर, ऑस्ट्रेलिया 2.7 मिलियन डॉलर, सिंगापुर 1.7 मिलियन डॉलर, ताइवान 1.3 मिलियन डॉलर और दक्षिण कोरिया को भी शिपमेंट भेजे गए।

लैटिन अमेरिका में भी ग्रोथ के अवसर

डेटा से पता चला कि जहां नेपाल जैसे पारंपरिक पड़ोसी बाजार 8.1 मिलियन डॉलर के इंपोर्ट के साथ महत्वपूर्ण डेस्टिनेशन बने रहे। वहीं, एडवांस्ड यूरोपीय मार्केट की ओर विस्तार भारत के EV एक्सपोर्ट प्रोफाइल में एक उल्लेखनीय बदलाव को दर्शाता है। लैटिन अमेरिका में भी नए अवसर सामने आए, जहां ब्राजील ने 2.4 मिलियन डॉलर, कोलंबिया ने 1 मिलियन डॉलर, चिली ने 0.4 मिलियन डॉलर और कोस्टा रिका ने 0.5 मिलियन डॉलर की भारतीय इलेक्ट्रिक गाड़ियों का इंपोर्ट किया।

ये भी पढ़ें

FDA ने सस्पेंड किया था मिठाई दुकान का लाइसेंस, कोर्ट ने दुकानदार के पक्ष में सुनाया फैसला- देने होंगे ₹5 लाख

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Auto से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें पैसा