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सोनभद्र में 3000 टन सोना एक साथ मिल गया तो भारत के लिए उसके मायने क्या?

सोने की यह मात्रा इतनी ज्यादा है कि अगर एक साथ भारत को इतना सोना मिल जाए तो देश की किस्मत बदल सकती है।

Manoj Kumar Manoj Kumar @kumarman145
Published on: February 21, 2020 18:34 IST
3000 tons of Gold and its benefits for India- India TV Paisa
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3000 tons of Gold and its benefits for India

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में सोने की खान मिलने का दावा किया जा रहा है और कहा जा रहा है कि पूरे क्षेत्र में लगभग 3000 टन सोने का भंडार है। उत्तर प्रदेश के खनिज विभाग ने सोनभद्र में सोने की खान होने की पुष्टि की है और जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के 15 साल के सर्वे के आधार पर 3000 टन सोने का भंडार होने का दावा किया जा रहा है। सोने की यह मात्रा इतनी ज्यादा है कि अगर एक साथ भारत को इतना सोना मिल जाए तो देश की किस्मत बदल सकती है।

12 लाख करोड़ से ज्यादा कीमत

सोने की मौजूदा कीमत लगभग 41000 रुपए प्रति 10 ग्राम के करीब है, यानि एक किलो सोने का भाव 41 लाख रुपए, एक क्विंटल सोने का 41 करोड़ रुपए और एक टन सोने का भाव लगभग 410 करोड़ रुपए बनता है। इस हिसाब से सोने के मौजूदा बाजार भाव के मुताबिक 3000 टन सोने की कीमत लगभग 12.30 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा बैठती है।

दूसरे स्थान पर पहुंच सकता है भारत

3000 टन सोना अगर एक साथ भारत सरकार के खजाने में चला जाए तो दुनियाभर में सोने के आधिकारिक रिजर्व के मामले में अमेरिका के बाद भारत दूसरे नंबर पर पहुंच सकता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2019 तक भारत के पास सोने का आधिकारिक तौर पर 633.1 टन सोने का रिजर्व है और दुनियाभर में भारत सोने के आधिकारिक रिजर्व के मामले में 9वें स्थान पर है। अगर इसमें 3000 टन सोना जुड़ जाए तो भारत का रिजर्व 3633 टन हो जाएगा और अमेरिका के बाद जर्मनी को पछाड़ भारत दूसरे स्थान पर पहुंच जाएगा, अमेरिका के पास फिलहाल 8133 टन और जर्मनी के पास 3366 टन सोने का आधिकारिक रिजर्व है।

5 साल तक सोना आयात की जरूरत नहीं!

3000 टन सोना अगर एक साथ भारतीय बाजार में सप्लाई कर दिया जाए तो देश को लगभग 5 साल तक विदेशों से सोना आयात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी और इसमें बहुमूल्य विदेशी मुद्रा की बड़ी मात्रा में बचत होगी। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक 2019 के दौरान भारत में सोने का आयात 646 टन दर्ज किया गया है।

6 साल तक पूरी हो सकती है ज्वैलरी की मांग!

भारत में एक साथ अगर 3000 टन सोने की ज्वैलरी बना दी जाए तो लगभग 6 साल तक सोने की ज्वैलरी की मांग को पूरा किया जा सकता है। वर्ष 2019 के दौरान भारत में ज्वैलरी के लिए लगभग 544 टन सोने की खपत हुई है और ज्वैलरी के लिए इस्तेमाल होने वाला अधिकतर सोना विदेशों से आयात होता है।

सोने के सिक्कों और छड़ों की मांग 20 साल तक हो सकती है पूरी!

भारत में मौजूदा समय में सोने के सिक्कों और सोने की छड़ों की जो मांग है उसे देखते हुए अगर एक साथ 3000 टन सोने के सिक्कों और छड़ों को बाजार में उतारा दिया जाए तो लगभग 20 साल की मांग पूरी हो जाएगी।

8-9 महीने के लिए दुनियाभर की सोने की मांग को किया जा सकता है पूरा!

3000 टन सोने की मात्रा इतनी ज्यादा है कि अगर यह एक साथ बाजार में आ जाए तो सिर्फ भारत नहीं बल्कि पूरी दुनिया में सोने के बाजार को प्रभावित कर सकता है। पूरी दुनिया में सालभर में 4000 से 4500 टन सोने की खपत होती है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक 2019 के दौरान दुनियाभर में लगभग 4355 टन सोने की मांग दर्ज की गई है। यानि 3000 टन सोना लगभग 8-9 महीने की मांग को पूरा कर देगा।

हालांकि जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के मुताबिक जिस 3000 टन सोने के भंडार का दावा किया जा रहा है वह सोने का खनिज है और उसकी खुदाई और रिफाइनिंग होगी तभी शुद्ध सोना मिल सकेगा और इसमें कई सालों का समय लग सकता है। ऐसे में एक साथ 3000 टन सोना मिलना मुश्किल है।

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