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कच्चे तेल की नरमी और रुपये में सुधार से बनी बात, नवंबर में 1 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी निवेश

Written by: IndiaTV Hindi Desk Published : Nov 18, 2018 01:20 pm IST, Updated : Nov 18, 2018 01:20 pm IST

देश के पूंजी बाजार में अक्टूबर में भारी निकासी के बाद नवंबर माह में विदेशी निवेशकों का निवेश तेजी से बढ़ा है। नवंबर में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने करीब 8,285 करोड़ रुपये का निवेश किया है।

Rupee - India TV Paisa

Rupee 

देश के पूंजी बाजार में अक्टूबर में भारी निकासी के बाद नवंबर माह में विदेशी निवेशकों का निवेश तेजी से बढ़ा है। नवंबर में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने करीब 8,285 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इसकी अहम वजह कच्चे तेल की कीमतों में कमी आना, रुपये में सुधार और पूंजी बाजार में खरीद-फरोख्त की स्थिति का बेहतर होना है। इससे पहले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने अक्टूबर महीने में पूंजी बाजार से 38,900 करोड़ रुपये की निकासी की थी। यह दो साल की सबसे बड़ी निकासी रही। 

एफपीआई ने इससे पिछले माह सितंबर 2018 में पूंजी बाजार से 21,000 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की थी। जबकि जुलाई-अगस्त में उन्होंने कुल 7,500 करोड़ रुपये का निवेश किया था। डिपॉजिटरी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने एक नवंबर से 16 नवंबर के बीच पूंजी बाजार में (शेयरों और ऋण बाजार में कुल मिलाकर) 8,285 करोड़ रुपये (1.14 अरब डॉलर) का निवेश किया है। इसमें 3,862 करोड़ रुपये शेयर बाजार में और 4,423 करोड़ रुपये ऋण बाजार में निवेश किए हैं। 

मॉर्निंगस्टार इंवेस्टमेंट एडवाइजर इंडिया में वरिष्ठ आकलन शोध प्रबंधक हिमांशु श्रीवास्तव का कहना है कि ताजा निवेश की अहम वजह कच्चे तेल की कीमतों में कमी, डॉलर के मुकाबले रुपये में सुधार और तरलता की स्थिति का बेहतर होना है। श्रीवास्तव के मुताबिक वैश्विक मोर्चे पर अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध का खतरा बढ़ने से उभरते बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है। इसके साथ ही वैश्विक बाजारों में ब्याज दरें बढ़ने से दुनियाभर के निवेशकों का रुख आकर्षक और सुरक्षित बाजारों की तरफ बढ़ा है। 

बहरहाल उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि वर्ष के बाकी हिस्से में देश में एफपीआई का प्रवाह बढ़ेगा। डालर और रुपये की घटबढ, कच्चे तेल का रुख, घरेलू स्तर पर तरलता की स्थिति और आगामी राज्य चुनाव और उसके बाद अगले साल आम चुनाव पर निवेशकों की नजर रहेगी। 

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