नई दिल्ली। दूरसंचार क्षेत्र के उद्योग संगठन सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) ने क्षेत्र में 2022 तक 100 अरब डॉलर (करीब 6.5 लाख करोड़ रुपए) का निवेश आकर्षित करने की सरकार की योजना को उम्मीद के मुकाबले कहीं कम बताया है। संगठन के महानिदेशक राजन एस. मैथ्यूज ने कहा कि महज दो कंपनियां भारती एयरटेल और रिलायंस जियो सिर्फ इसी साल 74,000 करोड़ रुपए का निवेश करने वाली हैं जो सरकार के लक्ष्य के अनुमानित लक्ष्य का 10 प्रतिशत से भी अधिक है।
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उन्होंने कहा कि दूरसंचार कंपनियां 10 अरब डॉलर निवेश कर रही हैं। आधा निवेश इन दोनों कंपनियों से ही आने वाला है। नई नीति के मसौदे में प्रस्तावित सुधार की सराहना करते हुए मैथ्यूज ने कहा कि स्पेक्ट्रम की कीमतों तथा संबंधित शुल्कों को तार्किक बनाया जाना इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देगा।
मैथ्यूज ने कहा कि यदि नीति के मसौदे में प्रस्तावित आधार पर इसका क्रियान्वयन किया गया, क्षेत्र भारी मात्रा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित करने में सक्षम होगा।
मैथ्यूज ने कहा कि सरकार को E एवं V बैंड में स्पेक्ट्रम का आवंटन बिना बोली के शुरू कर देना चाहिए जिससे सभी के लिए ब्रॉडबैंड का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में दूरसंचार क्षेत्र की हिस्सेदारी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 8 प्रतिशत किया जा सके।
सरकार ने नई दूरसंचार नीति (NTP) - ‘राष्ट्रीय डिजिटल दूरसंचार नीति 2018’ - में 2022 तक देश में 40 लाख नए रोजगार पैदा करने और 100 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही नीति के मसौदे में प्रत्येक नागरिक के लिये 50Mbps ब्रांडबैंड की कवरेज सुनिश्चित करने का भी लक्ष्य रखा गया है।