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यूपी रेरा के रडार पर 76 प्रोजेक्ट्स, तगड़े एक्शन की तैयारी- जानें क्या है पूरा मामला

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : Jun 28, 2026 09:54 am IST,  Updated : Jun 28, 2026 10:31 am IST

रेरा अधिनियम की धारा-4 और संबंधित नियमों एवं विनियमों के उल्लंघन पर परियोजना की अनुमानित लागत का 5 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

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सांकेतिक तस्वीर Image Source : FREEPIK

उत्तर प्रदेश भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (RERA) ने वित्त वर्ष 2024-25 की सालाना ऑडिट रिपोर्ट जमा नहीं करने वाले कुछ रियल एस्टेट प्रोमोटरों के खिलाफ गंभीर रुख अपनाया है। यूपी रेरा ने ऐसे 76 प्रोजेक्ट की पहचान की है, जिनके प्रोमोटरों ने अभी तक अपनी सालाना ऑडिट रिपोर्ट यूपी-रेरा के वेब पोर्टल पर अपलोड नहीं की है। 

रियल एस्टेट प्रोमोटरों को किन बातों का रखना चाहिए खास ध्यान

एक बयान के मुताबिक रियल एस्टेट प्रोमोटरों के लिए ये अनिवार्य है कि वे हर वित्त वर्ष खत्म होने पर अपने प्रोजेक्ट अकाउंट का ऑडिट कराएं और 6 महीने के भीतर सालाना ऑडिट रिपोर्ट यूपी-रेरा की वेबसाइट पर अपलोड करें, ताकि यूपी-रेरा प्रोजेक्ट्स की समीक्षा और मूल्यांकन कर सके तथा आम जनता और संबंधित परियोजनाओं के आवंटियों को भी सही जानकारी उपलब्ध हो सके। 

25,000 रुपये की देनी होगी लेट फीस

सालाना ऑडिट रिपोर्ट दाखिल नहीं करने पर संबंधित साल के लिए 25,000 रुपये की लेट फीस देनी होगी। वहीं, रेरा अधिनियम की धारा-4 और संबंधित नियमों एवं विनियमों के उल्लंघन पर परियोजना की अनुमानित लागत का 5 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है। उप्र यूपी के नियमों के अनुसार परियोजना खातों का वित्तीय ऑडिट प्रोमोटर द्वारा नियुक्त बाहरी ऑडिटर से कराया जाना आवश्यक है। ऑडिटर एक स्वतंत्र संस्था होनी चाहिए और वो प्रोमोटर की कंपनी, ग्रुप या उससे जुड़ी किसी संस्था का ऑडिटर नहीं होना चाहिए। इसका उद्देश्य परियोजनाओं की वित्तीय जानकारी में पारदर्शिता, स्वतंत्र जांच और सही रिपोर्टिंग सुनिश्चित करना है। 

सालाना ऑडिट रिपोर्ट दाखिल नहीं करना गंभीर लापरवाही

बयान के मुताबिक परियोजनाओं की सालाना ऑडिट रिपोर्ट यूपी-रेरा की वेबसाइट पर दाखिल नहीं करना गंभीर लापरवाही है। ये रेरा अधिनियम के उन प्रावधानों के विपरीत है, जिनका उद्देश्य प्रमोटरों के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उप्र-रेरा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी संबंधित प्रमोटरों को निर्देश दिए हैं कि वे 15 दिनों के भीतर निर्धारित लेट फीस के साथ सालाना ऑडिट रिपोर्ट अनिवार्य रूप से अपलोड करें। ऐसा नहीं करने पर रेरा द्वारा परियोजना की अनुमानित लागत का 5 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है। 

उल्लंघनकर्ता प्रोमोटरों को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस

इस मामले में सभी उल्लंघनकर्ता प्रोमोटरों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए गए हैं। उप्र-रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने कहा, "सालाना ऑडिट रिपोर्ट समय पर जमा करना प्रत्येक प्रमोटर की रेरा के तहत मूल जिम्मेदारी है। स्वतंत्र ऑडिट और सही रिपोर्टिंग से पारदर्शिता बढ़ती है और घर खरीदारों का विश्वास मजबूत होता है।'' उन्होंने कहा,'' उप्र रेरा इन प्रावधानों के कड़ाई से पालन को सुनिश्चित करता रहेगा, ताकि आवंटियों के हित सुरक्षित रहें और प्रदेश का रियल एस्टेट क्षेत्र अधिक जवाबदेह और भरोसेमंद तरीके से आगे बढ़े।" 

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