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भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में आया जबरदस्त उछाल! $14.1 अरब बढ़कर पहुंचा $707 अरब

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Aug 14, 2026 06:11 pm IST,  Updated : Aug 14, 2026 06:23 pm IST

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी खबर सामने आई है। देश के विदेशी मुद्रा भंडार में एक हफ्ते के दौरान जोरदार बढ़ोतरी हुई है। 7 अगस्त को खत्म हुए सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 14.136 अरब डॉलर बढ़कर 707.002 अरब डॉलर पहुंच गया।

भारत का विदेशी मुद्रा...- India TV Hindi
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $707 अरब पहुंचा Image Source : CANVA

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में एक बार फिर जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 7 अगस्त 2026 को खत्म हुए सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 14.136 अरब डॉलर बढ़कर 707.002 अरब डॉलर हो गया। रुपये में देखें तो इसमें करीब 1.20 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है।

RBI के आंकड़ों के अनुसार, एक हफ्ते में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 14.136 अरब डॉलर का इजाफा हुआ और यह बढ़कर 707.002 अरब डॉलर हो गया। रुपये में कुल रिजर्व करीब 67.32 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। इसका इस्तेमाल जरूरत पड़ने पर आयात भुगतान, विदेशी कर्ज और अंतरराष्ट्रीय भुगतान से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में किया जा सकता है।

सबसे ज्यादा बढ़ी फॉरेन करेंसी एसेट

भारत के रिजर्व में सबसे बड़ा हिस्सा फॉरेन करेंसी एसेट (FCA) का होता है। सप्ताह के दौरान इसमें 9.946 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई और यह 574.625 अरब डॉलर हो गया। इसके अलावा भारत के गोल्ड रिजर्व में 3.995 अरब डॉलर का इजाफा हुआ और यह बढ़कर 108.738 अरब डॉलर पहुंच गया। वहीं, SDR यानी स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स में 79 मिलियन डॉलर की वृद्धि हुई और यह 18.745 अरब डॉलर हो गया। IMF के पास भारत की रिजर्व पोजिशन भी 116 मिलियन डॉलर बढ़कर 4.894 अरब डॉलर हो गई।

मार्च के मुकाबले भी बढ़ा रिजर्व

आंकड़ों से पता चलता है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मार्च 2026 के अंत से अब तक 15.894 अरब डॉलर बढ़ चुका है। वहीं, पिछले एक साल में इसमें 13.384 अरब डॉलर की वृद्धि हुई है। यह भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति के लिहाज से अच्छा संकेत माना जा सकता है।

रुपये के लिए क्या है इसका फायदा?

विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने से भारत को वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच अतिरिक्त मजबूती मिलती है। पर्याप्त रिजर्व होने पर RBI जरूरत के समय विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है, जिससे रुपये में अचानक होने वाली तेज गिरावट को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है।

इनपुट- ANI

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