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ईरान और इजराइल बढ़ते तनाव के बीच सरकार ने विमान कंपनियों को दिया सुझाव, जानें डिटेल

 Edited By: Abhinav Shalya
 Published : Apr 16, 2024 05:33 pm IST,  Updated : Apr 16, 2024 05:33 pm IST

ईरान-इजराइल में तनाव के चलते सरकार की ओर से एयरलाइंस को जोखिम का आकलन करने के लिए कहा है। संकट को देखते हुए कुछ एयरलाइंस ने अपने मार्गों में भी बदलाव किया है।

प्रतीकात्मक तस्वीर- India TV Hindi
प्रतीकात्मक तस्वीर Image Source : FILE

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच नागर विमानन मंत्रालय ने सभी एयरलाइंस से अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के परिचालन को लेकर अपने स्तर पर जोखिम आकलन करने के लिए कहा है। एयर इंडिया, विस्तारा, इंडिगो और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने पश्चिमी देशों के लिए वैकल्पिक उड़ान मार्गों को चुना है। ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए एयरलाइंस अपनी उड़ानों का संचालन ईरान के हवाई क्षेत्र से होकर नहीं कर रही हैं। 

समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत करते हुए नागर विमानन सचिव वुमलुनमंग वुअलनम ने कहा कि सभी एयरलाइंस को अपने उड़ान संचालन के संबंध में अपना जोखिम मूल्यांकन खुद करने के लिए कहा गया है। उन्होंने कहा कि नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) सभी एयरलाइंस के साथ सहयोग और बातचीत कर रहा है। वह विदेश मंत्रालय के साथ भी संपर्क में है। पश्चिम एशिया में संकट बढ़ने के बीच मंत्रालय या डीजीसीए की तरफ से सभी एयरलाइंस को कोई सलाह दिए जाने के सवाल पर सचिव ने यह जानकारी दी। 

ईरान ने इजराइल पर किया हमला 

हाल ही में ईरान ने जवाबी हमले में इजराइल पर दर्जनों ड्रोन तथा मिसाइलें दागी थीं। इसके बाद इजराइल ने कहा था कि वह ईरान के इस हमले का जवाब देगा। इस कारण इलाके में तनाव बना हुआ है। 

एयरलाइंस ने बदला मार्ग

एयर इंडिया भारत में आवाजाही के लिए अपनी कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानें वैकल्पिक उड़ान मार्गों पर संचालित कर रहा है। विस्तारा ने भी पश्चिम एशिया संकट के कारण अपनी कुछ उड़ानों के मार्गों में बदलाव किया है। एयर इंडिया ने तेल अवीव के लिए अपनी उड़ानें अस्थायी रूप से निलंबित कर दी हैं। रेटिंग एजेंसी इक्रा के उपाध्यक्ष एवं कॉरपोरेट रेटिंग प्रमुख सुप्रियो बनर्जी ने पश्चिम एशिया संकट पर कहा कि वाणिज्यिक एयरलाइन को ‘उड़ान-निषेध’ नियमों का पालन करने के लिए लंबा मार्ग अपनाना पड़ सकता है, जिससे ईंधन खर्च बढ़ जाएगा। बनर्जी ने कहा कि अगर समस्या बनी रही तो इसका प्रभाव निकटवर्ती भौगोलिक क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा पर भी पड़ेगा। भू-राजनीतिक घटनाक्रम से कच्चे तेल की कीमतों और विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमतों पर भी दबाव पड़ेगा।

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