Sunday, February 15, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. पैसा
  3. बिज़नेस
  4. गोल्ड-सिल्वर ETF में आएंगे नए नियम, क्या बदलेगी आपकी रिटर्न स्ट्रैटेजी? जानें SEBI का प्लान

गोल्ड-सिल्वर ETF में आएंगे नए नियम, क्या बदलेगी आपकी रिटर्न स्ट्रैटेजी? जानें SEBI का प्लान

Edited By: Shivendra Singh Published : Feb 15, 2026 11:30 pm IST, Updated : Feb 15, 2026 11:30 pm IST

सोना और चांदी में निवेश करने वालों के लिए बड़ी खबर है। बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच मार्केट रेगुलेटर SEBI ने गोल्ड और सिल्वर ETF के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। 13 फरवरी 2026 को जारी कंसल्टेशन पेपर में सेबी ने ETF के बेस प्राइस और प्राइस बैंड की समीक्षा का संकेत दिया है।

ETF निवेशकों के लिए बड़ी...- India TV Paisa
Photo:CANVA ETF निवेशकों के लिए बड़ी खबर

सोना और चांदी में बढ़ती कीमतों की तेज हलचल ने ETF बाजार में भी अस्थिरता बढ़ा दी है। ऐसे में मार्केट रेगुलेटर SEBI अब एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) सेगमेंट के नियमों में अहम बदलाव की तैयारी कर रहा है। 13 फरवरी 2026 को जारी कंसल्टेशन पेपर में रेगुलेटर ने संकेत दिए हैं कि ETF के बेस प्राइस और प्राइस बैंड की समीक्षा की जाएगी। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो गोल्ड और सिल्वर ETF में ट्रेडिंग का तरीका बदल सकता है।

अभी क्या हैं नियम?

फिलहाल रोलिंग सेटलमेंट में शामिल ज्यादातर शेयरों पर दोनों तरफ 20% तक का प्राइस बैंड लागू होता है। हालांकि डेरिवेटिव वाले शेयरों पर यह नियम नहीं चलता। इसके अलावा 10%, 15% और 20% के मार्केट-वाइड सर्किट ब्रेकर भी लागू हैं, जो BSE Sensex या NSE Nifty 50 में से किसी एक के तय सीमा पार करने पर एक्टिव हो जाते हैं। गोल्ड और सिल्वर ETF के मामले में मौजूदा प्राइस बैंड T-2 दिन के NAV पर आधारित था। लेकिन जनवरी 2026 के आखिरी सप्ताह में सोना-चांदी की घरेलू और वैश्विक कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के दौरान यह व्यवस्था पर्याप्त साबित नहीं हुई। बाजार कीमत और अंडरलाइंग एसेट के बीच तालमेल बिगड़ने लगा।

SEBI का नया प्रस्ताव क्या है?

SEBI ने इक्विटी और डेट ETF के लिए शुरुआती प्राइस बैंड ±10% रखने का प्रस्ताव दिया है। जरूरत पड़ने पर इसे ±20% तक बढ़ाया जा सकेगा। हर बार बैंड बढ़ाने से पहले 15 मिनट का कूलिंग-ऑफ पीरियड होगा और दिन में अधिकतम दो बार ही इसे फ्लेक्स किया जा सकेगा। वहीं गोल्ड और सिल्वर ETF के लिए शुरुआती प्राइस बैंड ±6% रखने का सुझाव है। जरूरत पड़ने पर इसे भी ±20% तक बढ़ाया जा सकता है। इसमें भी 15 मिनट का कूलिंग-ऑफ पीरियड शामिल होगा।

निवेशकों की रणनीति पर क्या असर?

नए नियम लागू होने पर अचानक तेज उछाल या गिरावट पर कुछ हद तक नियंत्रण संभव है। इससे घबराहट में की जाने वाली ट्रेडिंग कम हो सकती है और NAV व बाजार कीमत के बीच का अंतर घट सकता है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह कदम स्थिरता बढ़ा सकता है।

Latest Business News

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Business से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें पैसा

Advertisement
Advertisement
Advertisement