सोना और चांदी में निवेश करने वालों के लिए बड़ी खबर है। बाजार में बढ़ती अस्थिरता के बीच मार्केट रेगुलेटर SEBI ने गोल्ड और सिल्वर ETF के नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। 13 फरवरी 2026 को जारी कंसल्टेशन पेपर में सेबी ने ETF के बेस प्राइस और प्राइस बैंड की समीक्षा का संकेत दिया है।
गोल्ड ईटीएफ में निवेश का आंकड़ा पहली बार इक्विटी म्यूचुअल फंड्स को पीछे छोड़ दिया। जनवरी में सोने की कीमतें ₹1.8 लाख प्रति 10 ग्राम के टॉप लेवल तक चली गई थीं।
अगर आप स्थिरता चाहते हैं तो गोल्ड ETF में निवेश कर सकते हैं। अगर आप हाई रिटर्न और रिस्क ले सकते हैं तो सिल्वर ETF में पैसा लगा सकते हैं। सलाह है कि कुल पोर्टफोलियो का 5–10% इनमें रखें, और SIP/लंपसम के जरिए निवेश करें।
सुरक्षित निवेश की मानी जाने वाली चमकदार धातुओं ने रविवार को निवेशकों को बड़ा झटका दे दिया। बजट 2026 के दिन हुए विशेष ट्रेडिंग सत्र में सोना और चांदी ही नहीं, बल्कि उनसे जुड़े एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) भी बुरी तरह टूट गए।
एम्फी के आंकड़ों के अनुसार, म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने दिसंबर में 66,591 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की जानकारी दी। इसका मुख्य कारण निश्चित आय वाली योजनाओं से भारी मात्रा में निकासी थी।
आज के समय में सोने-चांदी में निवेश के लिए कई विकल्प मौजूद हैं। आप चाहें तो सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के, ब्रिक/बार/बिस्कुट में निवेश कर सकते हैं या फिर डिजिटल गोल्ड या गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में भी पैसा लगा सकते हैं।
सोना और चांदी दोनों ही सुरक्षित निवेश के विकल्प हैं। हालांकि, चांदी की औद्योगिक मांग भी बहुत ज्यादा है और सोना, चांदी की तुलना में कम अस्थिरता के साथ बेहतर पूंजी संरक्षण प्रदान करता है।
सोने की कीमतों में अभी हाल ही में 250-300 डॉलर की तेजी मुख्य रूप से अमेरिकी सरकार के मौजूदा बंद को लेकर चिंताओं के बीच सुरक्षित निवेश में बढ़ी खरीदारी के कारण आई है।
म्यूचुअल फंड एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोने के हालिया प्रदर्शन, सुरक्षा और विविधीकरण की वजह से गोल्ड ईटीएफ में निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है।
साल 2025 में रिटर्न देने के मामले में Silver ETF ने गोल्ड ईटीएफ को भी पीछे छोड़ दिया। सिल्वर ईटीएफ ने इस साल अभी तक औसतन लगभग 42.67% रिटर्न दिया है।
इस साल जुलाई में ओवरऑल ईटीएफ में गोल्ड ईटीएफ को छोड़कर कुल 4476 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो जून में सिर्फ 844 करोड़ रुपये था।
गोल्ड ETF (एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स) स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होते हैं। इसकी कीमत फिजिकल गोल्ड से जुड़ी होती हैं।
सेंसेक्स ने 27 सितंबर को 85,978.25 अंकों का लाइफटाइम हाई अचीव किया था तो निफ्टी 50 ने भी इसी दिन 26,277.35 अंकों का अपना लाइफटाइम हाई टच किया था। हालांकि, शेयर बाजार में जारी गिरावट से आम निवेशक तंग आने लगे हैं और वे निवेश के लिए कोई ऐसा प्लान देख रहे हैं, जहां शेयर बाजार जैसा रिस्क न हो।
जनवरी 2025 में, गोल्ड ईटीएफ ने सबसे अधिक निवेश आया। गोल्ड ईटीएफ के प्रबंधन के तहत शुद्ध संपत्ति में जनवरी में 16.24% की वृद्धि देखी गई, जो दिसंबर में ₹44,595.60 करोड़ से बढ़कर 51,839.39 करोड़ रुपये हो गई।
सोने की बढ़ती कीमतों ने आम निवेशकों और खरीदारों की टेंशन बढ़ा दी है। इससे भी बड़ी टेंशन की बात ये है कि सोना खरीदने वाले लोगों को अब बढ़े हुए भाव के हिसाब से ही जीएसटी और मेकिंग चार्ज भी चुकाना होगा। अब मान लीजिए आप 80,000 रुपये की एक गोल्ड चेन खरीद रहे हैं, जिस पर 15 प्रतिशत मेकिंग चार्ज है।
एसजीबी तो बंद हो चुका है, लेकिन अगर आप गोल्ड में निवेश करना पसंद करते हैं तो आपके पास अभी भी कई ऑप्शन उपलब्ध हैं। यहां हम आपको गोल्ड में इंवेस्ट करने के लिए अलग-अलग इंवेस्टमेंट टूल्स के बारे में बताएंगे।
गोल्ड ईटीएफ एक एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) है जिसका उद्देश्य फिजिकल गोल्ड की कीमत को ट्रैक करना है। एक गोल्ड ईटीएफ इकाई 1 ग्राम सोने के बराबर होती है और प्योर गोल्ड द्वारा समर्थित होती है।
पिछले तीन साल में देखें तो सोने की कीमत में करीब 32,850 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इस तरह पिछले तीन साल में सोने ने लगभग 68.9% का रिटर्न दिया है। पांच साल में सोने ने 108.9% का बंपर रिटर्न दिया है।
अगर आपने अब तक निवेश की शुरुआत नहीं की है तो अक्षय तृतीया के शुभ मौके पर आप शुरू कर सकते हैं। यह आपकी आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में काफी मददगार साबित होंगे।
आज के समय में तो आप चाहें तो डिजिटल गोल्ड भी खरीद सकते हैं। कई पेमेंट ऐप का इस्तेमाल कर ऐसा किया जा सकता है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के जरिये भी सोने में निवेश कर सकते हैं। सरकार इस स्कीम को लेकर आती है।
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