Thursday, December 04, 2025
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बिहार चुनाव के चलते इंडस्ट्रीज में नई स्कीम की तैयारी, युवाओं के लिए खुल सकता है रोजगार का बड़ा मौका

बिहार में आज चुनाव परिणाम का इंतजार सिर्फ राजनीतिक हलचल नहीं बढ़ा रहा, बल्कि राज्य की औद्योगिक धड़कन भी इसी घड़ी पर टिकी है। लंबे समय से “बीमारू” टैग झेल रहा बिहार अब नई औद्योगिक स्कीमों और बड़े निवेश की तैयारी में है।

Edited By: Shivendra Singh
Published : Nov 14, 2025 06:55 am IST, Updated : Nov 14, 2025 06:55 am IST
बिहार के उद्योग और जॉब...- India TV Paisa
Photo:PTI बिहार के उद्योग और जॉब मार्केट की हालत पर विधानसभा चुनाव का बड़ा असर

बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम का इंतजार करते हुए राज्य के इंडस्ट्री सेक्टर में नए प्रोजेक्ट्स और इन्वेस्टमेंट को लेकर हलचल बढ़ गई है। लंबे समय से ‘बिमारू’ की छवि वाले राज्य में शिक्षा, रोजगार और इंडस्ट्रियल विकास की स्थिति राष्ट्रीय औसत से पीछे है, लेकिन हाल के निवेश और नए प्रोजेक्ट्स ने रोजगार के अवसरों को बढ़ाने की उम्मीद जगाई है।

राज्य की आर्थिक असमानता

राज्य का औसत प्रति व्यक्ति आय केवल 60,000 रुपये के करीब है, जो देशभर की औसत 1.89 लाख रुपये का लगभग एक-तिहाई है। शहरीकरण भी मात्र 12.4% है, जबकि देश का औसत 35.7% है। इस असंतुलन से स्पष्ट है कि आर्थिक अवसर राज्य के कुछ हिस्सों तक ही सीमित हैं।

इंडस्ट्रियल इतिहास का पतन

बिहार का इंडस्ट्रियल इतिहास गौरव और पतन दोनों की कहानी कहता है। सारण जिले के मारहोरा में मर्टन टोफी फैक्ट्री और शुगर मिल जैसी यूनिट्स दशकों तक स्थानीय अर्थव्यवस्था को चलाती रहीं, लेकिन अब ये बंद हैं। भागलपुर, कभी सिल्क इंडस्ट्री का केंद्र, अब लगभग 100 करोड़ रुपये का व्यापार करता है, जो दस साल पहले 600 करोड़ रुपये था। हालांकि, पायलट ईरी-सिल्क प्रोजेक्ट और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की शुरुआत ने इंडस्ट्री में नई उम्मीदें पैदा की हैं।

पटना में नई यूनिट्स

पटना क्षेत्र में विशेषकर बिहटा में छोटे पैमाने की फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स की स्थापना हो रही है। हाल ही में 350 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स के तहत यूनिफॉर्म, लैपटॉप और बैकपैक बनाने वाली फैक्ट्री में सैकड़ों रोजगार पैदा होंगे। वहीं, गया में बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी (BIMCGL) 1,670 एकड़ में फैली, 16,000 करोड़ रुपये की इन्वेस्टमेंट प्लानिंग से 1,09,000 नए रोजगार पैदा होंगी।

ऊर्जा और भारी उद्योग

ऊर्जा और भारी उद्योग में भी बड़े प्रोजेक्ट सामने आए हैं। आदानी पॉवर भगलपुर में 2400 मेगावाट की थर्मल पावर प्लांट बना रहा है, जो निर्माण के दौरान 10 से 12 हजार और स्थायी रूप से 3000 रोजगार देगा। मारहोरा में वाबटेक डीजल लोकोमोटिव प्लांट 5000 स्थानीय लोगों को रोजगार दे चुका है। हालांकि, बिहार के उद्योग क्षेत्र में ढांचागत चुनौतियां अभी भी बनी हैं। विनिर्माण क्षेत्र की हिस्सेदारी कुल जीएसवीए का 10% से भी कम है। इंडस्ट्रियल यूनिट्स की संख्या 3132 से घटकर 2782 हो गई है। जबकि बेरोजगारी दर कम हुई है, युवाओं के लिए स्थायी, वेतनभोगी रोजगार की कमी बनी हुई है।

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