रियल एस्टेट सेक्टर की लंबे समय से मांग है कि सरकार इसे उद्योग का दर्जा दे। साथ ही रियल्टी सेक्टर की कंपनियों की पॉलिसी में बदलाव की भी मांग रही है। लेकिन देखने वाली बात यह होगी कि चंद रोज बाद ही यानी आगामी 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट भाषण में क्या इनकी ये मांगें पूरी होंगी? रियल एस्टेट क्षेत्र में 2024-25 के केंद्रीय बजट के जरिये कुछ सुधार भी देखे गए। प्रधानमंत्री आवास योजना का विस्तार, औद्योगिक पार्कों और गलियारों के विकास पर ध्यान केंद्रित करना, स्टांप शुल्क में कमी, भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण सहित अन्य सुधार भी हुए। खबर के मुताबिक, तमाम सुधारों के बावजूद कुछ अहम मुद्दे अभी तक छूटे हैं, जिनको पूरा करने की मांग बरकरार है, जबकि पिछले वर्ष बदलते वैश्विक रुझानों के आधार पर कुछ नई मांगें उभरी हैं।
रियल एस्टेट क्षेत्र को मिले उद्योग का दर्जा
रियल्टी सेक्टर की मांग है रियल एस्टेट क्षेत्र को 'उद्योग' का दर्जा दिया जाना। इस तरह की विशिष्ट पहचान से ऐसी नीतियों और योजनाओं को बढ़ावा मिलेगा जो खासतौर से रियल एस्टेट क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करती हैं। फाइनेंशियल एक्स्प्रेस की खबर के मुताबिक, इनमें डेवलपर्स के लिए तुलनात्मक रूप से कम ब्याज दरों पर फंडिंग की उपलब्धता और क्षेत्र का टोटल रेगुलेशन आदि शामिल है।
सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम
बिल्डर्स और डेवलपर्स की का कहना है कि किसी प्रोजेक्ट के लिए, डेवलपर्स को एनएचएआई, एएआई, अग्निशमन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आदि जैसे विभिन्न केंद्रीय और राज्य स्तरीय प्राधिकरणों से कई अनापत्ति प्रमाण पत्र/अनुमोदन/अनुमति लेने की जरूरत होती है। इस वजह से प्रोजेक्ट के निर्माण में देरी और अड़चनें आती हैं। एकल खिड़की मंजूरी प्रणाली को लागू करने से डेवलपर्स को सभी जरूरी परमिशन एक इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म पर हासिल होगी जिससे परियोजना के विकास में होने वाली देरी में काफी कमी आ सकती है।
हाउसिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए सुधार
2024 में शुरुआती महीनों के बाद हाउसिंग सेक्टर में बिक्री में गिरावट का रुख रहा। इसके पीछे बाकी वजहों के अलावा संपत्ति की बढ़ती लागत भी है। इसलिए डेवलपर्स को उम्मीद है कि बजट में इस मुद्दे को एड्रेस किया जाएगा और हाउसिंग सेक्टर को पुनर्जीवित करने के लिए सुधार पेश किए जाएंगे।
जी.सी.सी. को मिले बढ़ावा
फाइनेंशियल एक्स्प्रेस की खबर के मुताबिक, भारत जी.सी.सी. सेट अप करने के लिए सबसे पसंदीदा जगहों में शुमार होने की तरफ अग्रसर है, क्योंकि इसकी रियल एस्टेट और ऑपरेशनल लागत प्रतिस्पर्धी है। खासकर टियर-II और टियर-III शहरों में, और संस्थागत मकान मालिकों की मौजूदगी है जो बहुराष्ट्रीय कंपनियों की जरूरतों को पूरा करने वाले हाई क्वालिटी वाले ऑफिस स्पेस स्थापित करने के व्यवसाय में हैं।