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क्रिटिकल मिनरल्स की आत्मनिर्भरता की ओर सरकार का बड़ा कदम, ₹1,500 करोड़ की योजना मंजूर, जानें डिटेल

 Published : Sep 03, 2025 09:16 pm IST,  Updated : Sep 03, 2025 09:16 pm IST

यह योजना नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन का हिस्सा है, जो भारत को खनिजों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने और हरित ऊर्जा संक्रमण को गति देने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। 'क्रिटिकल मिनरल्स' में कॉपर, लिथियम, निकेल, कोबाल्ट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स शामिल हैं।

यह योजना 6 वर्षों के लिए (वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक) है।- India TV Hindi
यह योजना 6 वर्षों के लिए (वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक) है। Image Source : FREEPIK

केंद्र सरकार ने देश में क्रिटिकल मिनरल्स यानी महत्वपूर्ण खनिजों के रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहित करने के लिए बुधवार को ₹1,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना का मकसद द्वितीयक स्रोतों (सेंकेडरी सोर्स) से खनिजों के अलगाव और उत्पादन की घरेलू क्षमता को विकसित करना है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, योजना का उद्देश्य हर साल 270 किलो टन रीसाइक्लिंग क्षमता का निर्माण, लगभग 40 किलो टन क्रिटिकल मिनरल्स का वार्षिक उत्पादन और करीब ₹8,000 करोड़ का निवेश करना है। साथ ही 70,000 नौकरियों (प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष) के अवसर भी पैदा होंगे।

क्या होते हैं क्रिटिकल मिनरल

यह योजना नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन का हिस्सा है, जो भारत को खनिजों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने और हरित ऊर्जा संक्रमण को गति देने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। आपको बता दें, 'क्रिटिकल मिनरल्स' में कॉपर, लिथियम, निकेल, कोबाल्ट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स शामिल हैं। ये खनिज बैटरियों, इलेक्ट्रिक वाहनों, सौर पैनलों और अन्य स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के निर्माण में अनिवार्य हैं। वैश्विक स्तर पर इनकी मांग तेज़ी से बढ़ रही है।

योजना की अवधि

यह योजना 6 वर्षों के लिए (वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक) है। इसमें केवल वही इकाइयां पात्र होंगी जो वास्तविक रीसाइक्लिंग में शामिल होंगी, न कि सिर्फ ब्लैक मास के उत्पादन में।

यह रीसाइक्लिंग ई-वेस्ट, लिथियम आयन बैटरियों का स्क्रैप, अन्य स्क्रैप, जैसे एंड-ऑफ-लाइफ वाहनों में लगे कैटलिटिक कन्वर्टर्स आदि स्रोतों से होगा। इस योजना के तहत कैपेक्स सब्सिडी,
प्लांट, मशीनरी और यूटिलिटी पर 20% सब्सिडी और समय पर उत्पादन शुरू करने पर पूरी सब्सिडी देने का प्रावधान है।

क्यों जरूरी है यह योजना?

क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन तैयार करने में लंबा समय लगता है, जैसे कि खनन की खोज, नीलामी, खदान संचालन और विदेशी खनिज परिसंपत्तियों की खरीद। जब तक देश में खुद का उत्पादन शुरू नहीं होता, तब तक इन खनिजों की रीसाइक्लिंग ही एक वास्तविक, तेज़ और किफायती विकल्प है।

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