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होम लोन का बोझ होगा कम! इस बैंक ने घटाई ब्याज दरें, जानिए कितने पैसे बचेंगे आपके?

अगर आप घर खरीदने की सोच रहे हैं या पहले से होम लोन चुका रहे हैं, तो आपके लिए एक बड़ी खुशखबरी है। एक सरकारी बैंक ने अपने ग्राहकों को राहत देते हुए लोन की ब्याज दरें घटाने का ऐलान किया है।

Edited By: Shivendra Singh
Published : Nov 12, 2025 01:40 pm IST, Updated : Nov 12, 2025 01:40 pm IST
इस बैंक का होम हो जाएगा...- India TV Paisa
Photo:CANVA इस बैंक का होम हो जाएगा कम

अगर आप घर या गाड़ी लोन की ईएमआई भरते हैं, तो आपके लिए एक राहत भरी खबर है। अब हर महीने आपकी जेब पर पड़ने वाला बोझ थोड़ा हल्का हो सकता है। देश के प्रमुख सरकारी बैंकों में से एक कैनरा बैंक (Canara Bank) ने अपने लोन पर ब्याज दरें घटाने का ऐलान किया है। बैंक ने सभी अवधियों (tenures) पर मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड-बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में 5 बेसिस पॉइंट्स यानी 0.05% की कटौती की है। यह नई दरें 12 नवंबर 2025 से प्रभावी होंगी।

अब इतने घटेगी ब्याज दर

कैनरा बैंक की नई MCLR दरें इस प्रकार हैं-

  • ओवरनाइट MCLR अब 7.90% (पहले 7.95%)
  • एक महीने की MCLR 7.95% (पहले 8.00%)
  • तीन महीने की MCLR 8.15% (पहले 8.20%)
  • छह महीने की MCLR 8.50% (पहले 8.55%)
  • एक साल की MCLR 8.70% (पहले 8.75%)
  • दो साल की MCLR 8.85%, जबकि
  • तीन साल की MCLR 8.90% कर दी गई है।

इस कटौती के बाद, कैनरा बैंक के होम, ऑटो और पर्सनल लोन पर ब्याज दरें घटेंगी, जिससे ईएमआई में कमी आ सकती है। उदाहरण के लिए, अगर किसी ग्राहक का 30 लाख रुपये का होम लोन है जिसकी अवधि 20 साल है, तो ब्याज दरों में 0.05% की गिरावट से हर महीने करीब 150-200 रुपये तक की बचत हो सकती है।

बाकी बैंक क्या कर रहे हैं?

जहां कैनरा बैंक ने ब्याज दरों में कटौती कर राहत दी है, वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) और आईडीबीआई बैंक (IDBI) ने अपनी लेंडिंग रेट्स में कोई बदलाव नहीं किया है। बैंक ऑफ बड़ौदा की एक साल की MCLR फिलहाल 8.75% पर बरकरार है। IDBI बैंक की एक साल की MCLR भी 8.75% है, जबकि तीन साल की दर 9.70% है।

क्या है MCLR?

MCLR यानी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड-बेस्ड लेंडिंग रेट वह बेस रेट है जिसके आधार पर बैंक अपने फ्लोटिंग रेट लोन जैसे होम लोन, पर्सनल लोन और ऑटो लोन की ब्याज दरें तय करते हैं। जब बैंक MCLR घटाते हैं, तो इसका सीधा फायदा उधारकर्ताओं को मिलता है या तो EMI कम होती है या लोन की अवधि घट जाती है।

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