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2000 रुपये की नोट वापसी को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, जानिए आप पर क्या पड़ेगा असर

 Published : Jul 03, 2023 01:33 pm IST,  Updated : Jul 03, 2023 01:34 pm IST

RBI ने 19 मई को दो हजार रुपये के नोटों को चलन से वापस लेने की घोषणा की थी और कहा था कि मौजूदा नोट को 30 सितंबर तक बैंक खातों में जमा किया जा सकता है या बदला जा सकता है।

2000 रुपये की नोट वापसी को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला- India TV Hindi
2000 रुपये की नोट वापसी को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला Image Source : FILE

रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा मई में 2000 के नोटों (2000 Rupee Note) की वापसी का बड़ा फैसला लिया था। इस प्रक्रिया के तहत अब तक 50 फीसदी नोट बैंकों में वापस आ चुके हैं। लेकिन रिजर्व बैंक के इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में दायर एक याचिका पर आज बड़ा फैसला आया है। दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) के मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायाधीश सुब्रमण्यम प्रसाद ने सोमवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दो हजार रुपये के नोट को चलन से वापस लेने के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज कर दी। इससे पहले, याचिका पर 30 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। 

जनहित याचिका में रिजर्व बैंक पर उठे थे सवाल

याचिकाकर्ता रजनीश भास्कर गुप्ता ने दलील दी थी कि आरबीआई के पास दो हजार रुपये के नोट को चलन से वापस लेने की कोई शक्ति नहीं है और इस संदर्भ में केवल केंद्र सरकार ही फैसला कर सकती है। उन्होंने अपनी याचिका में कहा था कि आरबीआई के पास किसी भी मूल्य के बैंक नोट को बंद करने का निर्देश देने की कोई स्वतंत्र शक्ति नहीं है। यह शक्ति केवल वर्ष 1934 के आरबीआई अधिनियम की धारा 24 (2) के तहत केंद्र सरकार के पास निहित है। याचिका का आरबीआई ने यह कहते हुए विरोध किया था कि दो हजार रुपये के नोट को चलन से वापस लेना श्मुद्रा प्रबंधन अभियान’ का हिस्सा है और यह आर्थिक योजना से जुड़ा मामला है। 

19 मई को रिजर्व बैंक का आया था फैसला 

आरबीआई ने 19 मई को दो हजार रुपये के नोटों को चलन से वापस लेने की घोषणा की थी और कहा था कि मौजूदा नोट को 30 सितंबर तक बैंक खातों में जमा किया जा सकता है या बदला जा सकता है। इससे पहले, उच्च न्यायालय ने वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका को खारिज कर दिया था। 

नागरिकों के लिए उठाया गया कदम 

याचिका में दावा किया गया था कि बिना किसी साक्ष्य के 2,000 रुपये के बैंक नोट को बदलने की सुविधा देने वाली वाली आरबीआई और एसबीआई की अधिसूचनाएं मनमानी और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए बनाये गये कानून के खिलाफ है। इस बारे में उच्च न्यायालय ने कहा था कि नागरिकों को होने वाली असुविधा से बचाने के लिए ऐसा किया गया है। अदालत ने यह भी कहा कि वह किसी नीतिगत निर्णय पर अपीलीय प्राधिकरण के रूप में कार्य नहीं कर सकती।

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