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रेल मंत्रालय का दावा: 8-14 दिसंबर के बीच औसतन 80% ट्रेनें समय पर चलीं, सोशल मीडिया पर लोगों की जबरदस्त प्रतिक्रिया

 Published : Dec 22, 2025 07:01 am IST,  Updated : Dec 22, 2025 07:01 am IST

एक तरह रेल मंत्रालय ने ट्रेनों के तय समय पर चलने की बात कही तो वहीं सोशल मीडिया पर यूजर्स की अलग-अलग राय दिखी। लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। कुछ ने नकारा तो कुछ ने कोहरे को जिम्मेदार माना।

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर खड़ी एक ट्रेन।- India TV Hindi
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर खड़ी एक ट्रेन। Image Source : INDIA TV

भारतीय रेल ने 8 से 14 दिसंबर के बीच अपनी ट्रेनों के समय पर चलने का दावा किया है, जिसमें कहा गया कि कुल मिलाकर औसतन 80% ट्रेने तय समय पर चलीं। रेल मंत्रालय ने यह ताजा आंकड़े जारी किए हैं। मंत्रालय ने इस दावे में कहा है कि रेलवे ने इस अवधि के बीच देशभर में ट्रेनों की समयपालन (पंक्चुअलिटी) में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। हालांकि, इस दावे के बाद सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने अपनी असहमति जताई और रेलवे की सेवाओं पर सवाल उठाए। लोग अपनी व्यक्तिगत अनुभवों के जरिए यह बताने लगे कि रेलवे के दावे हकीकत से दूर हैं और वास्तविकता में कई ट्रेनें विलंब से चल रही हैं। 

कुछ अग्रणी डिवीजनों में आंकड़ा 96% से भी ऊपर होने का दावा

रेलवे के अनुसार, इस अवधि में 22 डिवीजनों ने 90% से अधिक पंक्चुअलिटी हासिल की, जबकि कुछ अग्रणी डिवीजनों में यह आंकड़ा 96% से भी ऊपर रहा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि बेहतर परिचालन प्रबंधन, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और समन्वित प्रयासों के चलते ट्रेन सेवाओं की विश्वसनीयता बढ़ी है और यात्रियों को अधिक सुगम यात्रा अनुभव मिला है। रेलवे का दावा है कि इस सुधार से न केवल देरी में कमी आई है, बल्कि नेटवर्क पर ट्रेनों का संचालन भी पहले की तुलना में अधिक सुचारू हुआ है।

सोशल मीडिया पर लोगों की जबरदस्त प्रतिक्रिया

एक यूजर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रेलवे के इस दावे पर अपनी प्रतिक्रिया में लिखा- वह टाइम पर आना असली नहीं है। यह सिर्फ़ कागज पर मैनेज किया जाता है। कोई भी ट्रेन चुनें और टाइमटेबल देखें। दूसरे-आखिरी स्टॉप और आखिरी स्टेशन के बीच यात्रा का समय देखें। वे चुपचाप वहां एक घंटा एक्स्ट्रा जोड़ देते हैं। इसलिए, भले ही ट्रेन पिछले स्टेशनों पर घंटों लेट चल रही हो, यह बफर टाइम देरी को एडजस्ट कर लेता है। कागज पर ट्रेन "टाइम पर" पहुंचती है, लेकिन असल में वह कहीं भी टाइम पर नहीं होती। स्मार्ट चाल। नकली नंबरों के लिए बधाई।

कुछ यूजर्स ने कोहरे को भी जिम्मेदार माना

इसके अलावा, कई यूजर्स ने ट्रेन नंबर के साथ देरी के घंटों का स्क्रीन शॉट भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। हालांकि कुछ यूजर्स ने इस कोहरे के मौसम में ट्रेनों के देरी से चलने को लेकर सुरक्षा के लिहाज से सहमति भी जताई। उनका कहना था कि कोहरे को देखते हुए सुरक्षित मंजिल तक पहुंचना ज्यादा अच्छा है। आदित्य नाम के एक यूजर ने लिखा- खासकर गिट्टी की गहरी और उथली स्क्रीनिंग जैसे ट्रैक का रखरखाव सर्दियों में होता है और इससे ट्रेनों की आवाजाही में रुकावट आती है, बारिश में यह संभव नहीं है, इसलिए यह भी एक कारण है, कोहरे और कम विजिबिलिटी के कारण भी ट्रेनों की भीड़ हो जाती है, जिससे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले ट्रैक पर देरी होती है।

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