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FY2024-25 में भारत इस रफ्तार से करेगा तरक्की, एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट का अनुमान, जानें और क्या कहा

 Edited By: Sourabha Suman
 Published : Jan 08, 2025 06:21 pm IST,  Updated : Jan 08, 2025 06:21 pm IST

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष द्वारा लिखित रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रति व्यक्ति नाममात्र जीडीपी में मार्च 2025 को खत्म होने वाले चालू वित्त वर्ष में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

विनिर्माण क्षेत्र के खराब प्रदर्शन और कमजोर निवेश के चलते जीडीपी पर दबाव है।- India TV Hindi
विनिर्माण क्षेत्र के खराब प्रदर्शन और कमजोर निवेश के चलते जीडीपी पर दबाव है। Image Source : FILE

चालू वित्त वर्ष में भारत की विकास दर लगभग 6.3 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। एसबीआई की रिसर्च रिपोर्ट में यह ताजा अनुमान लगाया गया है। हालांकि, यह सरकार के 6.4 प्रतिशत के अनुमान से थोड़ा कम है। ऐसा अनुमान कमजोर मांग जैसे कई फैक्टर्स के चलते लगाया गया है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, मंगलवार को जारी राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा 2024-25 के लिए राष्ट्रीय आय के पहले अग्रिम अनुमान (एफएई) के मुताबिक, विनिर्माण क्षेत्र के खराब प्रदर्शन और कमजोर निवेश के चलते भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2024-25 में चार साल के निचले स्तर 6.4 प्रतिशत पर पहुंचने का अनुमान है।

गिरावट का रुख रहेगा

खबर के मुताबिक, एसबीआई की शोध रिपोर्ट 'इकोरैप' में कहा गया है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और एनएसओ के अनुमानों के बीच का अंतर हमेशा 20-30 बेसिस प्वाइंट की सीमा में होता है। इसलिए 2024-25 के वित्तीय वर्ष के लिए 6.4 प्रतिशत का अनुमान अपेक्षित और उचित है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि, हमारा मानना ​​है कि वित्त वर्ष 2025 के लिए जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) की वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत के आसपास रह सकती है, जिसमें गिरावट का रुख रहेगा।

चालू वित्त वर्ष में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष द्वारा लिखित रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रति व्यक्ति नाममात्र जीडीपी में मार्च 2025 को खत्म होने वाले चालू वित्त वर्ष में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है, जो वास्तविक जीडीपी वृद्धि में मंदी और नाममात्र जीडीपी वृद्धि के लगभग स्थिर रहने के बावजूद 2022-23 की तुलना में 35,000 रुपये अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सकारात्मक योगदान देने वाले मदों में नाममात्र शर्तों में 8.5 प्रतिशत (वास्तविक शर्तों में 4.1 प्रतिशत) की वृद्धि के साथ सरकारी खपत शामिल है। निर्यात ने भी 8 प्रतिशत (वास्तविक शर्तों में 5.9 प्रतिशत) की सकारात्मक वृद्धि के साथ मोर्चा संभाला है।

मांग का चिंताजनक पहलू  है सकल पूंजी निर्माण में मंदी

एसबीआई के रिसर्च में कहा गया है कि मांग का चिंताजनक पहलू सकल पूंजी निर्माण में मंदी है, साथ ही कहा गया है कि पूंजी निर्माण नाममात्र वृद्धि 270 बेसिस प्वाइंट घटकर 7. 2 प्रतिशत हो गई है। समग्र तस्वीर यह है कि मांग कमजोर बनी हुई है और वित्त वर्ष 2025 में क्रमिक मंदी 6. 4 प्रतिशत एक बाहरी सीमा है जबकि वास्तविक वृद्धि निश्चित रूप से अनुमानित आंकड़े से नीचे है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि नवंबर 2024 के अंत में राजकोषीय घाटा 8. 5 लाख करोड़ रुपये या बजट अनुमान का 52. 5 प्रतिशत था। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर सरकार 16. 1 लाख करोड़ रुपये के राजकोषीय घाटे पर कायम रहती है, तो संशोधित जीडीपी आंकड़ों के साथ, 2024-25 में जीडीपी के प्रतिशत के रूप में घाटा 5 प्रतिशत होगा।

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