आज जब डिजिटल लेन-देन ने लोगों की जिंदगी आसान बना दी है, लेकिन फिर भी नोट और सिक्कों का महत्व कम नहीं हुआ है। जेब में खनकते सिक्के और हाथ में करारा नोट अब भी रोजमर्रा की खरीददारी का अहम हिस्सा हैं। हालांकि, क्या आपने कभी सोचा है कि इन नोटों और सिक्कों को बनाने में सरकार को कितना खर्च उठाना पड़ता है? चौंकाने वाली बात यह है कि कई बार इनकी छपाई और मिंटिंग लागत इनकी असली कीमत के करीब या उससे भी ज्यादा होती है।
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में एक RTI के जरिए सामने आई जानकारी के मुताबिक, 1 रुपये का सिक्का बनाने में सरकार को करीब 1.11 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। यानी फेस वैल्यू से ज्यादा लागत। वहीं 2 रुपये का सिक्का 1.28 रुपये, 5 रुपये का सिक्का 3.69 रुपये और 10 रुपये का सिक्का लगभग 5.54 रुपये में तैयार होता है। इन्हें मुंबई और हैदराबाद के सरकारी मिंट में बनाया जाता है। बढ़ती महंगाई को देखते हुए माना जा रहा है कि 2025 तक यह लागत और ज्यादा हो चुकी होगी।
| सिक्के | बनाने का लागत |
| ₹1 | 1.11 रुपये |
| ₹2 | 1.28 रुपये |
| ₹5 | 3.69 रुपये |
| ₹10 | 5.54 रुपये |
सिक्कों की मिंटिंग में गिरावट
2017 में जहां 1 रुपये के 90.3 करोड़ सिक्के बनाए गए थे, वहीं 2018 में यह घटकर 63 करोड़ रह गए। वजह साफ है कि लोग अब छोटे-मोटे लेन-देन के लिए चेंज की झंझट से बचने के लिए यूपीआई और डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल कर रहे हैं।
नोट छापने की जिम्मेदारी किसकी?
जहां सिक्के भारत सरकार बनाती है, वहीं नोट छापने का जिम्मा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का होता है। इसके लिए RBI अपनी सहायक कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) और सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (SPMCIL) के जरिए देशभर में करेंसी प्रेस संचालित करता है।
नोट छापने का खर्च
| नोट | बनाने का लागत |
| ₹10 | 0.96 रुपये |
| ₹100 | 1.77 रुपये |
| ₹200 | 2.37 रुपये |
| ₹500 | 2.29 रुपये |
बढ़ती महंगाई और डिजिटल ट्रांजैक्शन का असर
एक्सपर्ट्स का मानना है कि नोटों और सिक्कों की लागत पर कच्चे माल और इंक की कीमतें असर डालती हैं। यही वजह है कि हर साल यह खर्च बढ़ता जाता है। हालांकि, डिजिटल पेमेंट सिस्टम के बढ़ने से नकदी की छपाई और मिंटिंग की मांग धीरे-धीरे घट रही है।






































