अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि भारत ने रूस से तेल की खरीदारी बंद कर दी है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि भारत नवंबर के अंत से रूसी कच्चे तेल की सीधी खरीद में कटौती करने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कदम रूस की दो प्रमुख तेल कंपनियों पर 21 नवंबर से लागू होने वाले नए अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद उठाया जा सकता है। हालांकि, इस मामले पर भारत के विदेश मंत्रालय ने स्थिति फिर से स्पष्ट की है।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा- “हम पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत की ऊर्जा नीति पूरी तरह राष्ट्रीय ऊर्जा जरूरतों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर आधारित होती है। इस मुद्दे पर हमारा रुख कई बार बताया जा चुका है। प्रवक्ता ने यह भी दोहराया कि भारत की तेल खरीद राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से तय की जाती है, न कि किसी बाहरी दबाव के आधार पर।
जयशंकर पहले भी कर चुके हैं स्पष्ट
इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी रूस से तेल आयात में कटौती को लेकर कहा था कि भारत का निर्णय उसकी ऊर्जा सुरक्षा रणनीति पर आधारित है। उन्होंने यह भी कहा था कि पश्चिमी देशों द्वारा भारत के तेल व्यापार पर सवाल उठाना दोहरे मापदंडों को दर्शाता है।
ट्रंप का बयान और व्यापारिक विवाद
ट्रंप ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संबंधों और व्यापारिक चर्चाओं की प्रगति को बेहद अच्छी बताया। उन्होंने कहा- उन्होंने (मोदी ने) रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है... काफी हद तक उन्होंने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है। ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिका ने भारत पर रूसी तेल की खरीद को लेकर 25 प्रतिशत अतिरिक्त कर लगाया था। यह कदम पहले से लागू 25 प्रतिशत जवाबी शुल्क के अतिरिक्त था, जिससे भारत पर कुल 50 प्रतिशत कर भार हो गया। भारत ने इस अमेरिकी कार्रवाई को अनुचित, अन्यायपूर्ण और अव्यावहारिक करार देते हुए कहा था कि उसकी ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हितों से प्रेरित है और किसी बाहरी दबाव में नहीं चलेगी।






































