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एक झटके में डॉलर के मुकाबले 1% से ज्यादा मजबूत हुआ भारतीय रुपया, RBI के बड़े फैसले से मिली जोरदार बढ़त

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Oct 12, 2026 10:35 am IST,  Updated : Oct 12, 2026 10:35 am IST

भारतीय रुपये की लगातार कमजोरी के बीच सोमवार को करेंसी बाजार से राहत देने वाली खबर आई। डॉलर के मुकाबले रुपया बाजार खुलते ही 1% से ज्यादा मजबूत हो गया।

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अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ भारतीय रुपया Image Source : CANVA

सोमवार को भारतीय मुद्रा बाजार में ऐतिहासिक उछाल देखने को मिला। बाजार खुलते ही डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 1% से ज्यादा मजबूत हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डॉलर की मांग पर लगाम लगाने वाले नए कदमों को इस तेजी की बड़ी वजह माना जा रहा है। RBI ने एक तरफ तेल कंपनियों के लिए डॉलर खरीदने की अलग व्यवस्था बनाई है, तो दूसरी तरफ विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी और डॉलर की वायदा मांग को नियंत्रित करने के लिए नियम सख्त किए हैं।

सोमवार को भारतीय रुपया 95.76 प्रति डॉलर पर खुला, जो शुक्रवार को कारोबार बंद होने के समय 96.73 प्रति डॉलर थी। यानी पिछले बंद स्तर के मुकाबले रुपये में करीब 1% की मजबूती दर्ज हुई। एशियाई करेंसी बाजार में भी भारतीय रुपया बेहतर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल रहा।

RBI ने डॉलर की मांग रोकने के लिए क्या किया?

RBI ने शनिवार को विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव से जुड़े कई नियमों में बदलाव किए। अब रद्द किए गए रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट को दोबारा बुक करने पर रोक लगा दी गई है। इसके अलावा, वास्तविक कारोबारी जरूरत से जुड़े प्रमाण के बिना किए जाने वाले कुछ लेनदेन की सीमा घटाई गई है। केंद्रीय बैंक ने कुछ विदेशी मुद्रा कॉन्ट्रैक्ट पर बैंकों को 20% नकद राशि अलग रखने का निर्देश भी दिया है। इससे रुपये की कमजोरी से बचाव के लिए डॉलर की वायदा खरीद करना महंगा हो सकता है। RBI का उद्देश्य बाजार में सट्टेबाजी को सीमित करना और कंपनियों की डॉलर मांग को कम करना है।

तेल कंपनियों के लिए बनाई अलग व्यवस्था

भारत में तेल आयात के लिए बड़ी मात्रा में डॉलर की जरूरत होती है। इससे विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग बढ़ सकती है। अब RBI ने तेल विपणन कंपनियों को केंद्रीय बैंक से सीधे डॉलर खरीदने के लिए विशेष व्यवस्था दी है। इससे उनकी खरीद का दबाव सामान्य बाजार से हट सकता है।

आगे रुपये पर क्या होगा असर?

RBI के इन कदमों से डॉलर खरीदने के तरीके और समय में बदलाव आ सकता है, लेकिन तेल आयात, व्यापार और विदेशी पूंजी के बाहर जाने जैसी वजहों से डॉलर की मूल मांग खत्म नहीं होगी। आयातकों के लिए डॉलर की वायदा हेजिंग महंगी हो सकती है, जबकि इंटरबैंक बाजार में वायदा डॉलर की मांग घटने से प्रीमियम पर नीचे की ओर दबाव पड़ सकता है।

इनपुट- PTI

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