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Inflation: देश के लोगों को अब नहीं चुभ रही महंगाई, सरकार का पूरा जोर अब तेज विकास परः सीतारमण

Inflation: आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में खाद्य वस्तुओं के दाम में नरमी से मुद्रास्फीति कम होकर 6.71 फीसदी पर आ गई।

Edited By: Alok Kumar @alocksone
Published : Sep 07, 2022 01:40 pm IST, Updated : Sep 07, 2022 01:40 pm IST
Nirmala Sitharaman- India TV Paisa
Photo:PTI Nirmala Sitharaman

Highlights

  • सरकार के लिए देश की आर्थिक वृद्धि ही प्राथमिकता बनी हुई है
  • कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता अब भी बनी हुई है
  • भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को और गहरा करने का आह्वान

Inflation: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि मुद्रास्फीति कम होकर वहनीय स्तर पर पहुंच गई है इसलिए सरकार के लिए देश की आर्थिक वृद्धि ही प्राथमिकता बनी हुई है। यहां ‘इंडिया आइडियाज समिट’ में वित्त मंत्री ने कहा कि रोजगार सृजन और धन का समान वितरण वे अन्य क्षेत्र हैं जिन पर सरकार का ध्यान है। उन्होंने कहा, ‘‘कुछ निश्चित तौर पर प्राथमिकताएं हैं और कुछ उतनी महत्वपूर्ण नहीं हैं। प्राथमिकताओं में शामिल हैं रोजगार, धन का समान वितरण और यह सुनिश्चित करना कि भारत वृद्धि के रास्ते पर बढ़े।’’ सीतारमण ने आगे कहा, ‘‘इस लिहाज से मुद्रास्फीति प्राथमिकता नहीं है। आपको इस बात से हैरानी नहीं होनी चाहिए। बीते कुछ महीनों में हम इसे वहनीय स्तर पर लाने में कामयाब रहे है।’’

खुदरा महंगाई में आई कमी

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक जुलाई में खाद्य वस्तुओं के दाम में नरमी से मुद्रास्फीति कम होकर 6.71 फीसदी पर आ गई हालांकि यह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की संतोषजनक स्तर की उच्च सीमा 6.0 प्रतिशत से लगातार सातवें महीने ऊपर बनी रही। जून 2022 में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति 7.01 प्रतिशत जबकि जुलाई 2021 में 5.59 प्रतिशत थी। अप्रैल से जून के बीच यह सात फीसदी के ऊपर बनी रही। वित्त मंत्री ने भरोसा जताया कि अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व और यूरोपीयन सेंट्रल बैंक द्वारा दरों में तेज वृद्धि से उत्पन्न अस्थिरता से रिजर्व बैंक निपट लेगा। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के कारण पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता अब भी बनी हुई है। उन्होंने भुगतान प्रौद्योगिकी समेत हर लिहाज से भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को और गहरा करने का आह्वान किया।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ाकर 2,000 अरब डॉलर करने का लक्ष्य

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि पिछले वित्त वर्ष में भारत का माल एवं सेवा का निर्यात 675 अरब डॉलर को पार कर गया और अब देश 2030 तक अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ाकर 2000 अरब डॉलर तक पहुंचाना चाहता है। स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी में संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं और छात्रों से बातचीत करते हुए गोयल ने कहा कि जब भारत अपनी 100वीं वर्षगांठ मनाएगा तब तक उसकी अर्थव्यवस्था 30,000 अरब डॉलर की हो जाएगी। गोयल ने कहा, ‘‘2047-2050 तक, जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे कर रहा होगा तब सामान्य परिदृश्य में भारत कम से कम 30,000 अरब की अर्थव्यवस्था होगा और सरकार की योजनाएं काम कर गईं तो अर्थव्यवस्था कम से कम 35,000 से 45,000 अरब डॉलर की होगी। अपनी 3300 अरब की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के साथ भारत दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इस सूची में उससे पहले अमेरिका, चीन, जापान और जर्मनी हैं। उद्योग मंत्री ने कहा कि सरकार ने बीते कुछ वर्ष ऐसा आधार बनाने में लगाए जिन पर देश तेजी से परिवर्तित हो सके, इसकी अर्थव्यवस्था बढ़ सके, प्रणालियां बेहतर बनें और प्रौद्योगिकी में आगे बढ़ें। उन्होंने कहा, ‘‘पिछले वित्त वर्ष में हमारा माल एवं सेवाओं का निर्यात पहली बार 675 अरब डॉलर पर पहुंच गया। हमें उम्मीद है कि 2030 तक अंतरराष्ट्रीय व्यापार बढ़कर 2000 अरब डॉलर का हो जाएगा।’’

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