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केबल टीवी सेवा देने वालों पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय की सख्ती, 10 दिन के अंतर यह काम पूरा करने का दिया निर्देश

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा कि मंत्रालय के संज्ञान में यह आया है कि कुछ ने अभी तक पंजीकरण नहीं कराया है।

Edited By: Alok Kumar @alocksone
Published : Nov 16, 2022 07:08 am IST, Updated : Nov 16, 2022 07:08 am IST
केबल टीवी - India TV Paisa
Photo:FILE केबल टीवी

केबल टीवी सेवा देने वालों पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने सख्त रुख अख्तियार किया है। मंत्रालय ने ने केबल टीवी सेवाएं देने वाले परिचालकों (एमएसओ) को अगले 10 दिन के भीतर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में अपना पंजीकरण कराने का आदेश दिया है। ऐसा न करने पर परिचालकों को लाइसेंस निरस्त किया जा सकता हैं। सूचना और प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) ने मई में एमएसओ से हेड-एंड स्थानों, शर्त आधारित पहुंच प्रणाली, परिवहन स्ट्रीम/फ्रीक्वेंसी जानकारी, आरएफ फीड डिटेल्स, सीटीएवी संकेत वितरण इलाके के बारे में जानकारी देने को कहा था। एमएसओ को इस उद्देश्य के लिए बनाई गई वेबसाइट पर जानकारी साझा करने के लिए कहा गया था। 

कई टेबल टीवी आपरेटर पर कार्रवाई संभव 

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा कि मंत्रालय के संज्ञान में यह आया है कि कुछ एमएसओ ने अभी तक पंजीकरण नहीं कराया है और पोर्टल पर जानकारी नहीं साझा की है। केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम 1994 के नियम 10ए के तहत नियमों को लागू करते हुए मंत्रालय ने सभी एमएसओ को पोर्टल पर खुद को 25 नवंबर, 2022 तक पंजीकृत करने या उससे पहले आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करने के लिए कहा है। मंत्रालय ने कहा है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर आवश्यक जानकारी साझा करने में विफल रहने पर यह माना जाएगी कि एमएसओ ने उन्हें दिए गए पंजीकरण के नियमों और शर्तों का उल्लंघन किया है। ऐसे में माना जा रहा है कि कई केबल टीवी ऑपरेटरों पर कार्रवाई की जा सकती है। 

इससे पहले फीड की निगरानी करने का फैसला किया था 

इससे पहले सरकार ने किसी तरह का दखल दिए बगैर केबल ऑपरेटरों के ‘आउटपुट फीड’ की निगरानी करने का फैसला किया था। इसके लिए सरकार ने बहु-प्रणाली ऑपरेटरों (एमएसओ) के ‘हेड-एंड’ पर एक निगरानी उपकरण लगाने की बात कही थी। हेड-एंड केबल टेलीविजन प्रणाली में नियंत्रण केंद्र होते है। इनमें केबल नेटवर्क में पेश किए जाने से पहले विभिन्न संकेतों को एक साथ लाया जाता है और निगरानी की जाती है। मंत्रालय ने आगाह किया ज्ञिज्ञ कि इसमें किसी भी तरह के असहयोग को अधिनियम की धारा 10 ए की उप-धारा 4 के उल्लंघन के रूप में माना जाएगा और उल्लंघन करने वालों को कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। 

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