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ट्रंप की ट्रेड वार का असर: अमेरिकी टैरिफ के बाद 37.5% गिरा भारत का एक्सपोर्ट, कई सेक्टर पर पड़ा भारी असर

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Nov 03, 2025 06:49 am IST,  Updated : Nov 03, 2025 06:49 am IST

भारत के लिए अमेरिका से आई यह खबर किसी झटके से कम नहीं। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मई से सितंबर 2025 के बीच अमेरिका को भारत का एक्सपोर्ट 37.5% तक लुढ़क गया है।

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अमेरिका को होने वाला भारत का निर्यात 37.5% लुढ़का Image Source : CANVA

अमेरिका के बढ़े हुए टैरिफ ने भारतीय निर्यात बाजार को गहरा झटका दिया है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, मई से सितंबर 2025 के बीच भारत का अमेरिका को होने वाला निर्यात 37.5% तक गिर गया है। यह पिछले कुछ वर्षों में भारतीय निर्यात प्रदर्शन में दर्ज सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मानी जा रही है। आपको बता दें कि अमेरिका ने अप्रैल 2025 में भारतीय वस्तुओं पर 10% टैरिफ लगाया था, जो अगस्त तक बढ़कर 50% तक पहुंच गया। इस कदम के तुरंत बाद भारत से अमेरिका जाने वाला निर्यात 8.8 अरब डॉलर से घटकर 5.5 अरब डॉलर रह गया। अमेरिकी बाजार में भारत का प्रदर्शन इतना खराब पहले कभी नहीं देखा गया था।

टैरिफ-फ्री सामान पर भी भारी असर

इस गिरावट का सबसे ज्यादा नुकसान उन वस्तुओं को हुआ जो पहले टैरिफ-फ्री थीं। ऐसी वस्तुएं जो भारत के कुल अमेरिकी निर्यात का लगभग एक-तिहाई हिस्सा थीं, उनमें 47% की गिरावट दर्ज की गई। मई में इनका निर्यात 3.4 अरब डॉलर था, जो सितंबर में घटकर 1.8 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

स्मार्टफोन और दवाइयों पर पड़ा सबसे बड़ा झटका

भारत के स्मार्टफोन एक्सपोर्ट में जबरदस्त गिरावट आई। जहां 2024-25 के बीच अप्रैल से सितंबर तक यह 197% बढ़ा था, वहीं अब इसमें 58% की गिरावट दर्ज की गई। मई में 2.29 अरब डॉलर का निर्यात घटकर सितंबर में सिर्फ 884.6 मिलियन डॉलर रह गया।

वहीं, फार्मास्युटिकल सेक्टर यानी दवा निर्यात में भी 15.7% की गिरावट आई। दवा निर्यात 745.6 मिलियन डॉलर से घटकर 628.3 मिलियन डॉलर हो गया।

मेटल और ऑटो सेक्टर भी नहीं बचे

औद्योगिक धातुओं और ऑटो पार्ट्स के निर्यात में भी असर देखने को मिला। इस कैटेगरी में औसतन 16.7% की गिरावट दर्ज की गई। इसमें एल्यूमीनियम 37%, कॉपर 25%, ऑटो कंपोनेंट 12% और आयरन-स्टील 8% नीचे गए। विशेषज्ञों के मुताबिक यह गिरावट भारत की प्रतिस्पर्धा की वजह से नहीं, बल्कि अमेरिकी इंडस्ट्रियल डिमांड की कमी के चलते आई है।

जेम्स-ज्वेलरी और टेक्सटाइल में तबाही

भारत के लेबर-इंटेंसिव सेक्टर, जैसे टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, केमिकल्स और एग्री-फूड्स ने संयुक्त रूप से 33% की गिरावट दर्ज की। खासकर जेम्स और ज्वेलरी सेक्टर में 60% की भारी गिरावट आई। मई में जहां इस सेक्टर का निर्यात 500.2 मिलियन डॉलर था, वहीं सितंबर में यह घटकर 202.8 मिलियन डॉलर रह गया। GTRI के अनुसार, इस गिरावट से थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों ने भारत का बाजार हिस्सा छीनना शुरू कर दिया है।

सोलर और ग्रीन एनर्जी एक्सपोर्ट पर भी असर

रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में भी 60.8% की गिरावट दर्ज की गई। सोलर पैनल का निर्यात 202.6 मिलियन डॉलर से घटकर 79.4 मिलियन डॉलर रह गया। वहीं चीन और वियतनाम जैसे देशों को अमेरिका में कम टैरिफ (20–30%) का फायदा मिल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द नीति-स्तर पर कदम नहीं उठाए गए तो भारत वियतनाम, मेक्सिको और चीन जैसे देशों से अपने पारंपरिक बाजार खो सकता है। GTRI की रिपोर्ट के मुताबिक, इन टैरिफों ने भारतीय निर्यातकों के मार्जिन को बुरी तरह दबा दिया है और देश के एक्सपोर्ट सेक्टर की संरचनात्मक कमजोरियों को उजागर किया है।

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