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सरकार के खर्चे बढ़े, आमदनी घटी! आधे साल में ही राजकोषीय घाटा 36.5% के पार, क्या होगा आगे?

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Oct 31, 2025 05:53 pm IST,  Updated : Oct 31, 2025 05:53 pm IST

वित्त वर्ष 2025-26 के पहले छह महीनों में ही केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा 36.5% तक पहुंच गया है, यानी आधे साल में ही सरकार ने पूरे साल के लिए तय किए गए घाटे का एक-तिहाई से ज्यादा हिस्सा पार कर लिया है।

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केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा सालभर के लक्ष्य का 36.5% पहुंचा Image Source : CANVA

देश की अर्थव्यवस्था के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर आई है। वित्त वर्ष 2025-26 के पहले छह महीनों में ही केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा सालभर के लक्ष्य के 36.5% तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में काफी ज्यादा है। वित्त वर्ष 2024-25 की इसी अवधि में राजकोषीय घाटा सिर्फ 29% था। यह स्थिति ऐसे समय आई है जब सरकार लगातार विकास परियोजनाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक योजनाओं पर भारी खर्च कर रही है, जबकि टैक्स रेवेन्यू और अन्य आय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो पाई है।

कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (CGA) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच केंद्र का राजकोषीय घाटा 5,73,123 करोड़ रुपये रहा। सरकार ने पूरे वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे का अनुमान 15.69 लाख करोड़ रुपये (GDP का 4.4%) रखा है। यानी आधे साल में ही टारगेट का एक-तिहाई से ज्यादा खर्च हो चुका है।

CGA के अनुसार, सरकार को सितंबर तक कुल 16.95 लाख करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई है, जो सालाना बजट अनुमान का 49.6% है। इसमें 12.29 लाख करोड़ रुपये टैक्स रेवेन्यू, 4.6 लाख करोड़ रुपये नॉन-टैक्स रेवेन्यू और 34,770 करोड़ रुपये नॉन डेब्ट कैपिटल रिसिप्ट शामिल हैं।

क्यों बढ़ रहा घाटा?

विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्व संग्रह में सुस्ती और कैपिटल एक्सपेंडिचर में तेजी के कारण घाटा बढ़ा है। कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, सब्सिडी और ग्रामीण योजनाओं पर सरकार ने इस साल ज्यादा खर्च किया है। वहीं, कर वसूली में सुधार की गति धीमी रही है, खासकर कॉरपोरेट टैक्स और कस्टम ड्यूटी से आय में। वित्त मंत्रालय का कहना है कि दूसरी छमाही में टैक्स कलेक्शन और डिविडेंड इनकम में सुधार की उम्मीद है, जिससे घाटे को कंट्रोल रखा जा सकेगा। मंत्रालय का टारगेट है कि पूरा वित्त वर्ष खत्म होने तक राजकोषीय घाटा 4.4% के भीतर रहे। हालांकि, आर्थिक जानकार चेतावनी दे रहे हैं कि यदि सरकार खर्चों पर लगाम नहीं लगाती, तो महंगाई और ब्याज दरों पर दबाव बढ़ सकता है।

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