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डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान! जेनेरिक दवाओं के आयात पर लगेगा 200% तक टैरिफ; भारत की फार्मा कंपनियों पर क्या होगा असर?

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Jul 22, 2026 03:36 pm IST,  Updated : Jul 22, 2026 03:36 pm IST

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर अगले दो साल तक कोई टैरिफ नहीं लगेगा, लेकिन इसके बाद अगस्त 2028 से 100% और फिर 200% तक टैरिफ लगाया जाएगा।

ट्रंप ने 2028 से जेनेरिक...- India TV Hindi
ट्रंप ने 2028 से जेनेरिक दवाओं पर 100% और फिर 200% टैरिफ लगाने का किया ऐलान Image Source : ANI/CANVA

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जेनेरिक दवाओं के आयात को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में आने वाली जेनेरिक दवाओं पर फिलहाल दो साल तक कोई टैरिफ नहीं लगेगा, लेकिन इसके बाद अगस्त 2028 से 100% टैरिफ और उसके अगले चरण में 200% तक टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रंप सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य दवा निर्माण को अमेरिका के भीतर बढ़ावा देना है। इस फैसले से भारत की फार्मा कंपनियों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि भारत अमेरिका को जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा निर्यातक है।

ट्रंप के मुताबिक, 1 अगस्त 2026 से अगले दो वर्षों तक आयातित जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ शून्य रहेगा। इसके बाद अगस्त 2028 से एक साल के लिए 100% टैरिफ लागू किया जाएगा और फिर इसे बढ़ाकर 200% कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो कंपनियां अमेरिका में प्लांट नहीं लगाएंगी, उन्हें इस भारी टैक्स का सामना करना पड़ेगा।

भारत के लिए क्यों है अहम फैसला?

भारत को दुनिया की फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड कहा जाता है। भारतीय कंपनियां अमेरिका समेत कई देशों को सस्ती जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराती हैं। वर्ष 2025 में भारत ने अमेरिका को 9.7 अरब डॉलर की दवाओं का निर्यात किया था, जो देश के कुल फार्मा निर्यात का लगभग 38% था। ऐसे में नया टैरिफ लागू होने पर भारतीय दवा कंपनियों की लागत और कारोबार दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

अमेरिका में भी उठ रहे सवाल

एक्सपर्ट्स और हेल्थ सेक्टर से जुड़े कई संगठनों ने इस प्रस्ताव पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि आयातित जेनेरिक दवाओं पर भारी टैरिफ लगाने से अमेरिका में दवाएं महंगी हो सकती हैं। इससे मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और कई जरूरी दवाओं की कमी भी हो सकती है। अमेरिका में इस्तेमाल होने वाले लगभग 90% प्रिस्क्रिप्शन जेनेरिक दवाओं के हैं, जिनमें बड़ी हिस्सेदारी भारत में बनी दवाओं की है।

फार्मा कंपनियों की बढ़ी चिंता

ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इस नीति से अमेरिका में दवा निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी निर्भरता कम होगी। वहीं भारतीय दवा उद्योग इस फैसले पर नजर बनाए हुए है। यदि यह योजना तय समय पर लागू होती है, तो भारत की फार्मा कंपनियों को अपनी निर्यात रणनीति और निवेश योजनाओं में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं। फिलहाल कंपनियों के पास अगले दो वर्षों का समय है, लेकिन उसके बाद अमेरिकी बाजार में कारोबार करना पहले जितना आसान नहीं रहेगा।

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