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UPI ट्रांजैक्शन पर लगने वाले MDR चार्ज का फैसला नहीं होगा वापस, सरकार ने साफ किया अपना रुख!

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Sep 16, 2026 10:37 pm IST,  Updated : Sep 16, 2026 10:37 pm IST

UPI पर नए MDR चार्ज को लेकर चल रही बहस के बीच सरकार ने अपना रुख साफ कर दिया है। ₹2000 से ज्यादा के मर्चेंट UPI पेमेंट पर लगने वाला 0.4% MDR चार्ज वापस नहीं लिया जाएगा। सरकारी सूत्रों के मुताबिक इस फैसले पर दोबारा विचार करने या इसे वापस लेने का कोई सवाल नहीं है।

UPI पर लगने वाले MDR चार्ज...- India TV Hindi
UPI पर लगने वाले MDR चार्ज को वापस नहीं लेगी सरकार: सोर्स Image Source : PTI

₹2,000 से ज्यादा के यूपीआई मर्चेंट पेमेंट्स पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के फैसले पर सरकार ने अपना रुख पूरी तरह सख्त कर लिया है। व्यापारियों, दुकानदारों और राजनीतिक दलों के भारी विरोध के बावजूद, सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इस नीतिगत फैसले को वापस लेने या इस पर पुनर्विचार करने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

बुधवार को एक शीर्ष सरकारी अधिकारी से जब पूछा गया कि क्या सरकार ₹2000 से ऊपर के मर्चेंट पेमेंट्स पर प्रस्तावित MDR चार्ज को वापस लेने पर विचार कर रही है, तो उन्होंने दो-टूक जवाब दिया। अधिकारी ने कहा कि यह निर्णय पूरे यूपीआई इकोसिस्टम के व्यापक हित में लिया गया है और इसे बदलने की कोई संभावना नहीं है। विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, द्वारा लगाए गए अमेरिकी दबाव के आरोपों को खारिज करते हुए सरकार ने कहा कि नए MDR फ्रेमवर्क से यूपीआई आत्मनिर्भर, वित्तीय रूप से मजबूत और तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित बनेगा।

संसदीय समिति की चेतावनी

वित्त संबंधी संसद की स्थायी समिति (32वीं रिपोर्ट) ने चेतावनी दी थी कि जीरो-MDR व्यवस्था से सरकारी खजाने पर भारी दबाव पड़ रहा है। समिति ने बताया कि ज़ीरो-MDR नीति को चालू रखने के लिए सरकार को हर साल लगभग ₹2,000 करोड़ की बजटीय सहायता देनी पड़ रही थी। संसदीय पैनल ने जोर देकर कहा था कि सरकारी खजाने पर निर्भर रहने के बजाय एक टिकाऊ राजस्व मॉडल बनाना यूपीआई के लॉन्ग टर्म भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।

ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा असर

छह साल से चले आ रहे पूरी तरह मुफ्त यूपीआई पेमेंट्स के दौर में यह बड़ा बदलाव जरूर है, लेकिन सरकार ने आम जनता और छोटे कारोबारियों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। वित्त मंत्रालय ने साफ किया कि MDR का भुगतान मर्चेंट्स (दुकानदारों) को करना होगा, ग्राहकों को नहीं। आम यूजर्स पर कोई मासिक कोटा या सीमा लागू नहीं होगी। वहीं, पर्सन-टू-पर्सन (P2P) ट्रांसफर और ₹2,000 तक के छोटे मर्चेंट पेमेंट्स पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। सरकार का कहना है कि एकत्र किए गए MDR शुल्क का एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल पेमेंट्स के विस्तार और सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर में लगाया जाएगा।

इनपुट- PTI

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