पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब सीधे आम लोगों की जेब पर दिखने लगा है। महज डेढ़ महीने के अंदर ही महंगाई ने ऐसी रफ्तार पकड़ी है कि पूरे साल जितनी कीमतें बढ़ती थीं, उतनी बढ़ोतरी अब कुछ ही हफ्तों में देखने को मिल रही है। इसका सबसे बड़ा असर घर की रसोई पर पड़ा है, जहां खर्च 15 से 20 फीसदी तक बढ़ गया है।
पाम ऑयल, सूखे मेवे और खाद्य तेलों की कीमतों में तेज उछाल ने किचन का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। अब महंगाई सिर्फ तेल तक सीमित नहीं रही, बल्कि हल्दी, जीरा, मसाले, मूंगफली और करीब 25 से ज्यादा रोजमर्रा की चीजें महंगी हो गई हैं। दिल्ली के किराना व्यापारियों का कहना है कि आयात प्रभावित होने से पाम ऑयल महंगा हुआ है, जिसका असर रिफाइंड, सरसों, सूरजमुखी और मूंगफली तेल पर भी पड़ा है। इन सभी तेलों की कीमतों में करीब 15% तक की बढ़ोतरी हो चुकी है।
पैकेजिंग महंगी, कंपनियों ने बढ़ाए दाम
महंगाई का एक बड़ा कारण पैकेजिंग कॉस्ट भी है। कागज और प्लास्टिक के दाम बढ़ने से कंपनियों की लागत बढ़ गई है। इसका असर सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ा है, क्योंकि कई मसाला कंपनियों ने अपने प्रोडक्ट्स के दाम 10-15% तक बढ़ा दिए हैं।
45 दिन में सालभर जितनी महंगाई
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, सामान्य हालात में भारत में सालभर में औसतन 4% के आसपास महंगाई बढ़ती है। लेकिन मौजूदा हालात में सिर्फ 45 दिनों में ही महंगाई करीब 5% तक बढ़ गई है। इसका मतलब है कि जो बढ़ोतरी पूरे साल में होती, वह अब बहुत कम समय में ही हो रही है। यह स्थिति आम लोगों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गई है।
थोक महंगाई भी पहुंची 3 साल के उच्च स्तर पर
महंगाई का असर सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं है। थोक महंगाई (WPI) भी तेजी से बढ़ी है। मार्च में यह बढ़कर 3.88% हो गई, जो पिछले 38 महीनों का उच्च स्तर है। फरवरी में यह 2.13% थी, यानी एक महीने में ही 1.75% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खाने-पीने की चीजों और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लागत बढ़ने से यह उछाल देखने को मिला है।
आगे और बढ़ सकती है महंगाई
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में महंगाई और बढ़ सकती है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और पीएनजी के दाम बढ़ने की संभावना है। अगर ऐसा होता है, तो इसका असर ट्रांसपोर्ट, उत्पादन और सप्लाई चेन पर पड़ेगा, जिससे हर चीज महंगी हो सकती है।
गृहिणियों के लिए चुनौती बना बजट
बढ़ती महंगाई ने घर चलाना मुश्किल कर दिया है। खासकर मध्यम वर्गीय परिवारों में गृहिणियों के लिए बजट संभालना बड़ी चुनौती बन गया है। रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ने से खर्च बढ़ रहा है, लेकिन आमदनी उतनी तेजी से नहीं बढ़ रही।