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क्या UPI ट्रांजैक्शन पर MDR फीस वसूलने से पड़ेगा असर, जानें क्या बोले RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा

 Written By: Sunil Chaurasia
 Published : Oct 07, 2026 04:25 pm IST,  Updated : Oct 07, 2026 04:25 pm IST

NPCI ने पिछले महीने कारोबारी यूपीआई खाते को किए जाने वाले 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाने घोषणा की थी।

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RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा Image Source : PTI

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि UPI ट्रांजैक्शन पर MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) के रूप में मामूली फीस लगाए जाने से यूपीआई लेनदेन की मात्रा पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने बुधवार को MPC के फैसलों की घोषणा करने के बाद कहा, ''फिलहाल हमें लेनदेन की मात्रा में कोई गिरावट नहीं दिख रही है। और मुझे व्यक्तिगत रूप से नहीं लगता कि मामूली फीस का लेनदेन की मात्रा पर कोई बड़ा असर पड़ेगा।'' 

2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई लेनदेन पर लगेगा 0.4 प्रतिशत एमडीआर

बताते चलें कि भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने पिछले महीने कारोबारी यूपीआई खाते को किए जाने वाले 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाने घोषणा की थी। ये फीस व्यापारियों से ली जाएगी। संजय मल्होत्रा ने कहा कि बैंकों की कर्ज वृद्धि आगे भी मजबूत बनी रहेगी और इससे व्यापक आर्थिक गतिविधियों को समर्थन मिलता रहेगा। 

अत्यधिक नकदी के बीच कर्ज देने वाली NBFCs की संपत्ति की गुणवत्ता पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव पर नजर

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि आरबीआई अत्यधिक नकदी के बीच कर्ज देने वाली NBFCs की संपत्ति की गुणवत्ता पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव से अवगत है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक को ऐसी स्थिति पैदा होने की आशंका नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सप्ताह में बैंकों में अतिरिक्त नकदी देखी गई है लेकिन ये लंबे समय तक नहीं बनी रहेगी। 

एफसीएनआर (बी) योजना से आए 133 अरब अमेरिकी डॉलर

संजय मल्होत्रा ने ये भी कहा कि रियायती अदला-बदली सुविधा के तहत प्रवासी भारतीयों से करीब 133 अरब अमेरिकी डॉलर की जमा राशि जुटाया जाना एफसीएनआर (बी) योजना और देश की व्यापक आर्थिक बुनियाद की मजबूती को बताता है। आरबीआई गवर्नर के अनुसार, केंद्रीय बैंक को भरोसा है कि बैंक इस राशि का उपयोग सूझ-बूझ के साथ करेंगे। मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के कारण पूंजी प्रवाह में कमी आई है और चालू खाते पर बना दबाव अस्थायी समस्या है।

जल्द ही सरप्लस की स्थिति में लौट आएगा भुगतान संतुलन

उन्होंने भरोसा जताया कि भुगतान संतुलन जल्द ही सरप्लस की स्थिति में लौट आएगा। मल्होत्रा ने आरबीआई द्वारा टाटा संस के एनबीएफसी लाइसेंस वापस करने के अनुरोध को खारिज करने और उच्च श्रेणी (अपर लेयर) की एनबीएफसी से जुड़े नियमों के अनुपालन के लिए देश के सबसे बड़े कारोबारी समूह की होल्डिंग कंपनी को शेयर बाजार में लिस्ट होने को कहे जाने के संबंध में पूछे गये सवाल का कोई जवाब नहीं दिया।

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