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'UPI लेनदेन की MDR फीस ग्राहकों से नहीं वसूल सकते दुकानदार', जानें क्या बोले सरकारी बैंक के CEO

 Written By: Sunil Chaurasia
 Published : Oct 06, 2026 07:15 pm IST,  Updated : Oct 06, 2026 07:15 pm IST

पंजाब एंड सिंध बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ स्वरूप कुमार साहा ने कहा कि यूपीआई के जरिए भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी एमडीआर ग्राहकों से नहीं वसूल सकते हैं।

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ग्राहकों से MDR फीस नहीं वसूल सकते दुकानदार Image Source : AFP

15 अक्टूबर से UPI के जरिए किसी दुकानदार, व्यापारी को किए जाने वाले 2000 रुपये से ज्यादा के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत का MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) वसूला जाएगा। इस फीस का बोझ आम ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा और इसका भुगतान दुकानदार को करना होगा। हालांकि, आम ग्राहक इस चिंता में हैं कि दुकानदार इस MDR का बोझ उन्हीं पर डाल देगा। देश के प्रमुख सरकारी बैंक- पंजाब एंड सिंध बैंक के CEO ने ग्राहकों की इस चिंता को दूर कर दिया है।

15 अक्टूबर से लागू होगी MDR फीस

पंजाब एंड सिंध बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ स्वरूप कुमार साहा ने कहा कि यूपीआई के जरिए भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी एमडीआर ग्राहकों से नहीं वसूल सकते हैं। उन्होंने कहा कि 15 अक्टूबर के बाद भी खुदरा ग्राहकों को वस्तुओं और सेवाओं के लिए वही कीमत चुकानी होगी, जो व्यापारी ने संबंधित सामग्री में प्रदर्शित की है। 

एक लेनदेन पर अधिकतम 300 रुपये लगेगा एमडीआर

सीईओ ने कहा कि 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से ज्यादा के व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर फीस लगेगी, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। हालांकि, दो व्यक्तियों के बीच लेनदेन पर कोई फीस नहीं लगेगी। स्वरूप कुमार साहा ने पीटीआई से कहा, ''यूपीआई के जरिये भुगतान स्वीकार करते समय व्यापारियों को एमडीआर का शुल्क ग्राहकों से लेने की अनुमति नहीं है। व्यवस्था ये सुनिश्चित करती है कि ग्राहक सिर्फ वस्तु पर प्रदर्शित कीमत का ही भुगतान करें।'' 

2000 रुपये तक के सभी ट्रांजैक्शन होंगे फ्री

स्वरूप कुमार साहा ने कहा कि 2000 रुपये तक के छोटे अमाउंट के यूपीआई लेनदेन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ऐसे लेनदेन व्यापारियों के कुल यूपीआई की मात्रा के 95 प्रतिशत से ज्यादा हैं। साहा ने कहा कि उचित एमडीआर लगाने का मकसद ये सुनिश्चित करना है कि रोजमर्रा के लेनदेन के लिए यूपीआई सुलभ और सुविधाजनक बना रहे और इसके पूरे सिस्टम को लंबे समय तक टिकाऊ बनाया जा सके। 

सामान्य परिचालन खर्च मानी जाती है भुगतान स्वीकार करने की लागत

सरकारी बैंक के टॉप अधिकारी ने कहा कि बाजार की परिस्थितियां और भुगतान के पिछले रुझान बताते हैं कि व्यापारी कारोबार बढ़ाने के लिए मामूली डिजिटल भुगतान लागत को खुद वहन करते हैं। उन्होंने कहा कि भुगतान स्वीकार करने की लागत सामान्य परिचालन खर्च मानी जाती है, जिसकी भरपाई ज्यादा ग्राहकों के आने, औसत खरीद मूल्य बढ़ने और नकदी संभालने से जुड़े जोखिम कम होने से हो जाती है। 

रेलवे, टेलीकॉम बिल, इंश्योरेंस और पेट्रोल-डीजल पर अधिकमत 5 रुपये की देनी होगी फीस

साहा ने कहा कि ग्राहक वस्तुओं और सेवाओं के लिए सूचीबद्ध कीमत का ही भुगतान करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि रेलवे, टेलीकॉम बिल, इंश्योरेंस और पेट्रोल-डीजल सहित कुछ खास श्रेणियों के व्यापारियों के लिए 2000 रुपये से ज्यादा के लेनदेन पर 5 रुपये का एमडीआर लागू होगा।

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