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UPI पेमेंट पर 15 अक्टूबर से लागू होने वाला MDR नियम क्या टल जाएगा? Paytm-MobiKwik के शेयर हुए धड़ाम

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Oct 08, 2026 05:56 pm IST,  Updated : Oct 08, 2026 05:56 pm IST

यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर आ रही ताजा खबरों ने शेयर बाजार में फिनटेक कंपनियों के बीच हड़कंप मचा दिया है। ऐसी खबरें हैं कि 15 अक्टूबर से लागू होने वाले MDR नियम की तारीख को टालकर 1 जनवरी किया जा सकता है।

UPI पेमेंट पर लागू होने...- India TV Hindi
UPI पेमेंट पर लागू होने वाला MDR नियम टल जाएगा? Image Source : ANI

डिजिटल पेमेंट और फिनटेक सेक्टर में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया जब यूपीआई (UPI) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की तारीख टलने की खबरें सामने आईं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 15 अक्टूबर से लागू होने वाले इस नियम को अब 1 जनवरी 2026 तक स्थगित करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इस पर अभी तक सरकार की तरह से कोई बयान नहीं आया है। वहीं, तारीख आगे बढ़ने और अनिश्चितता के माहौल से घबराए निवेशकों ने फिनटेक कंपनियों के शेयरों में जमकर बिकवाली की, जिससे पेटीएम और मोबिक्विक जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर भारी गिरावट के साथ बंद हुए।

पेटीएम 10% टूटा

यूपीआई से अतिरिक्त कमाई की उम्मीद लगाए बैठी फिनटेक कंपनियों के शेयरों को इस खबर से भारी झटका लगा। पेटीएम की मूल कंपनी के शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर 10 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ ₹1,560.60 के स्तर पर आ गए। वहीं, मोबिक्विक का शेयर 8.43 प्रतिशत की गोता लगाते हुए ₹234.40 पर बंद हुआ। इसके अलावा, अन्य फिनटेक कंपनी पाइन लैब्स (Pine Labs) का शेयर 4.95% गिरकर ₹168.75 और नेटवर्क पीपल सर्विसेज टेक्नोलॉजीज (NPST) का शेयर 4.39% टूटकर ₹1,772.60 पर आ गया।

क्या है UPI पर MDR का पूरा नियम?

हाल ही में सरकार ने यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वसूलने की अनुमति दी थी। इस नियम के तहत ₹2,000 से अधिक के डिजिटल लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत का शुल्क (MDR) तय किया गया था। यह शुल्क व्यापारियों से लिया जाएगा, जिससे पेमेंट गेटवे और पेटीएम/मोबिक्विक जैसी कंपनियों को राजस्व में बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। पिछले महीने जब इस फैसले का ऐलान हुआ था, तब इन फिनटेक कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी देखी गई थी।

क्यों टल सकती है 15 अक्टूबर की डेडलाइन?

सूत्रों के मुताबिक, मर्चेंट्स और कारोबारियों की तरफ से इस व्यवस्था को लागू करने के लिए कुछ और समय की मांग की गई है। यही वजह है कि सरकार और संबंधित एजेंसियां इसे 15 अक्टूबर के बजाय 1 जनवरी से लागू करने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही हैं। हालांकि, इस पर अंतिम आधिकारिक फैसला अगले कुछ दिनों में आने की संभावना है। लेकिन फिलहाल लागू होने की तिथि आगे खिसकने की खबर ने बाजार का मूड पूरी तरह बिगाड़ दिया है।

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