SEBI ने अमेरिकी ट्रेडिंग फर्म जेन स्ट्रीट (Jane Street) को सिक्यॉरिटी मार्केट से बैन कर दिया है और कंपनी को 4843 करोड़ रुपये के अवैध मुनाफे को वापस करने का निर्देश दिया है। ये भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा निर्देशित अब तक की सबसे ज्यादा वसूली गई रकम हो सकती है। कंपनी पर इंडेक्स ऑप्शन में भारी मुनाफा कमाने के लिए एक्सपायरी के दिनों में इंडेक्स लेवल में कथित रूप से हेराफेरी करने का आरोप है। सेबी ने अंतरिम आदेश में जेन स्ट्रीट की सब्सिडरी कंपनियों- जेएसआई इन्वेस्टमेंट्स, जेएसआई2 इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड, जेन स्ट्रीट सिंगापुर प्राइवेट लिमिटेड और जेन स्ट्रीट ग्रुप (जेएस ग्रुप) की जेन स्ट्रीट एशिया ट्रेडिंग (ऑनलाइन कारोबार) को बाजार से प्रतिबंधित कर दिया है।
45 देशों में ट्रेडिंग ऑपरेट करता है जेन स्ट्रीट ग्रुप
जेन स्ट्रीट ग्रुप की स्थापना 2000 में की गई थी। ये एलएलसी फाइनेंशियल सर्विस इंडस्ट्री में एक वैश्विक स्वामित्व वाली ट्रेडिंग कंपनी है। ये अमेरिका, यूरोप और एशिया में 5 कार्यालयों में 2600 से ज्यादा लोगों को रोजगार प्रदान करती है और 45 देशों में ट्रेडिंग ऑपरेट करती है। सेबी द्वारा गुरुवार को पारित अंतरिम आदेश के अनुसार, जेएस ग्रुप की कंपनियों ने एनएसई के सभी प्रोडक्ट कैटेगरी और सेगमेंट में जनवरी 2023 से मार्च 2025 तक एनएसई पर इंडेक्स ऑप्शन से 44,358 करोड़ रुपये से ज्यादा का प्रॉफिट कमाया। इसके अलावा, कंपनियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी धोखाधड़ी, हेराफेरी या अनुचित व्यापार व्यवहार में शामिल होने या प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी ऐसी गतिविधि में शामिल होने से बचने का निर्देश दिया गया, जो मानदंडों का उल्लंघन करती हों।
सेबी ने ये भी उल्लेख किया कि जेएस ग्रुप ने फिर से एक्सपायरी डे के करीब सूचकांक और घटक बाजारों में बड़े हस्तक्षेप के प्रथम दृष्टया हेराफेरी ‘एक्सटेंडेड मार्किंग द क्लोज’ कारोबार तरीके को अपनाने का सहारा लिया, ताकि मई 2025 में अपने अवैध लाभ के लिए इंडेक्स को प्रभावित और हेराफेरी की जा सके। जबकि फरवरी में चेतावनी पत्र और एनएसई के समक्ष इसकी अपनी घोषणाएं थीं।
निवेशकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हो सकती है कंपनी
सेबी के फुलटाइम मेंबर अनंत नारायण जी. ने आदेश में कहा, ‘‘ फरवरी 2025 में एनएसई द्वारा उन्हें जारी किए गए स्पष्ट परामर्श की स्पष्ट अवहेलना करते हुए ऐसा गंभीर व्यवहार स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि अधिकतर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों और अन्य बाजार सहभागियों के विपरीत, जेएस ग्रुप उचित काम नहीं करता है जिस पर भरोसा किया जा सके या जिस पर भरोसा किया जाना चाहिए। प्रथम दृष्टया ऐसे मजबूत मामले को देखते हुए जेएस ग्रुप को पहले की तरह काम जारी रखने की अनुमति देने से असाधारण पैमाने पर निवेशकों की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है। ऐसे में सेबी का कर्तव्य है कि वे सीधे हस्तक्षेप करे।’’ तदनुसार, सेबी ने जेएस ग्रुप को 4843.57 करोड़ रुपये के अवैध लाभ को वापस करने का निर्देश दिया है।
पीटीआई इनपुट्स के साथ