ऐसे निवेशक हैं जो स्थिरता और भरोसेमंद रिटर्न चाहते हैं, तो उनके लिए सावधि जमा यानी एफडी लंबे समय से पसंदीदा विकल्प रहे हैं। एफडी सुनिश्चित रिटर्न देते हैं और वित्तीय सुरक्षा का एहसास दिलाते हैं। एफडी (फिक्स्ड डिपोजिट) सिर्फ पारंपरिक बैंक सावधि जमा तक ही सीमित नहीं हैं। हाल के वर्षों में कॉर्पोरेट एफडी भी एक वैकल्पिक निवेश विकल्प के रूप में पॉपुलर हो गए हैं। कई निवेशकों को कॉर्पोरेट एफडी और बैंक एफडी के बीच चुनाव करते समय दुविधा का सामना करना पड़ता है। हालांकि दोनों ही आपकी बचत को बढ़ाने के उद्देश्य से हैं, लेकिन निर्णय लेने से पहले आपको इन दोनों एफडी के बीच कुछ महत्वपूर्ण अंतरों को जान लेना चाहिए।
बैंक एफडी का क्या मतलब
बैंक एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) बैंकों द्वारा प्रदान किया जाने वाला एक वित्तीय साधन है, जहां आप एक निश्चित अवधि के लिए पूर्व निर्धारित ब्याज दर पर एकमुश्त राशि जमा करते हैं। इसे कम जोखिम वाला निवेश माना जाता है क्योंकि इसमें रिटर्न की गारंटी होती है और मूल राशि सुरक्षित रहती है। बैंक एफडी अवधि के आधार पर अलग-अलग ब्याज दरें ऑफर करते हैं और आमतौर पर जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम (डीआईसीजीसी) द्वारा ₹5 लाख तक का बीमा किया जाता है।
कॉर्पोरेट एफडी का क्या मतलब
कॉर्पोरेट एफडी कंपनियों या निगमों द्वारा प्रदान किया जाने वाला एक फिक्स्ड डिपॉजिट है। बैंक एफडी की तरह, आप एक निश्चित अवधि के लिए एक राशि जमा करते हैं और कंपनी आपको मूलधन पर ब्याज प्रदान करती है। हालांकि, कॉर्पोरेट एफडी आमतौर पर बढ़े हुए जोखिम के कारण बैंक एफडी की तुलना में अधिक ब्याज दरें प्रदान करते हैं। इस एफडी में सरकारी एजेंसियों द्वारा रिटर्न की गारंटी नहीं होती है, इस वजह से यह थोड़ा जोखिम भरा है। इसलिए, निवेश करने से पहले आपको कंपनी की वित्तीय स्थिति का सावधानीपूर्वक आकलन करना चाहिए। कॉर्पोरेट एफडी उन लोगों के लिए सही है जो संभावित रूप से अधिक रिटर्न के बदले में अधिक जोखिम उठाने को तैयार हैं।
बैंक एफडी और कॉर्पोरेट एफडी में कितना अंतर
बैंक एफडी में ब्याज दर आमतौर पर कम होता है। जमा राशि की सुरक्षा की बात करें तो आरबीआई नियमों और 5 लाख रुपये तक के डीआईसीजीसी बीमा के कारण इसे आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है। इसमें 5-10 वर्ष की लॉक-इन अवधि वाली एफडी पर कर छूट भी पा सकते हैं। टाटा कैपिटल मनीफाई के मुताबिक, बैंक एफडी में समय से पहले निकासी पर 1-2% ब्याज का जुर्माना लगाया जाता है। बैंक एफडी में निवेश अवधि 7 दिन से लेकर 10 वर्ष तक है।
जबकि, कॉर्पोरेट एफडी में ब्याज दर अधिक हो सकती है। साथ ही इसमें संभावित रूप से बेहतर रिटर्न मिल सकता है। जमा पैसे की सुरक्षा की बात करें तो जारीकर्ता संस्था की वित्तीय सहायता पर निर्भरता के कारण कॉर्पोरेट एफडी में जोखिम अधिक है। कॉर्पोरेट एफडी में निवेश पर आपको कोई टैक्स छूट नहीं मिलती है। साथ ही अगर आप कॉर्पोरेट एफडी में जमा पैसे समय से पहले निकालते हैं तो 2-3% ब्याज लिया जाता है। कॉर्पोरेट एफडी में 6 महीने से लेकर 5 साल तक के लिए निवेश किया जा सकता है।
निष्कर्ष
यानी कुल मिलाकर बैंक एफडी में निवेश करने पर आपको गारंटीड रिटर्न मिलता है और आपके पैसे सुरक्षित भी रहते हैं। हां, ब्याज दर थोड़ी कम हो सकती है। लेकिन कॉर्पोरेट एफडी में ब्याज दर ज्यादा मिल सकती है, लेकिन जमा पैसे को लेकर जोखिम भी रहता है।
(Disclaimer: ये कोई निवेश सलाह नहीं है बल्कि सिर्फ एक जानकारी है। रुपये-पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लें।)






































