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आपको इस साल नहीं मिलेगा Form 16! बदले में जानें कंपनी कौन सा फॉर्म देगी, बदलने जा रहा आयकर नियम

 Published : Mar 24, 2026 11:29 am IST,  Updated : Mar 24, 2026 11:33 am IST

1 अप्रैल 2026 से टैक्स स्लैब या टैक्स की दरें नहीं बदल रही हैं। बदलाव मुख्य रूप से रिपोर्टिंग, सत्यापन और प्रक्रिया में है। फॉर्म ज्यादा विस्तृत और डिजिटल होंगे। सैलरी और TDS रिपोर्टिंग ज्यादा पारदर्शी होगी। ITR फाइलिंग ज्यादा ऑटोमेटेड और आसान होगी ।

सैलरीड क्लास के लिए प्री-फिल्ड रिटर्न और भी ज्यादा मददगार होंगे।- India TV Hindi
सैलरीड क्लास के लिए प्री-फिल्ड रिटर्न और भी ज्यादा मददगार होंगे। Image Source : FREEPIK

अगर आप टैक्सपेयर हैं तो आपके लिए जरूरी अपडेट है। आपको इस साल इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने का नया अनुभव होगा। दरअसल, 1 अप्रैल 2026 से आईटीआर फाइलिंग में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। 1 अप्रैल 2026 से आयकर रिटर्न (आईटीआर) फाइलिंग पूरी तरह से नए अवतार में होगी। आयकर नियम 2026 लागू होने के साथ सरकार सिर्फ फॉर्म नंबर ही नहीं बदल रही, बल्कि रिपोर्टिंग की पूरी प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी, मानकीकृत और सिस्टम-ड्रिवन बनाने जा रही है। इस बदलाव के तीन बड़े पहलु हैं। एक तो नए डिजाइन वाले ITR फॉर्म होंगे। फॉर्म 16 की जगह नया फॉर्म 130 आ जाएगा। साथ ही बदलाव के बाद अधिक ऑटोमेटेड और प्री-फिल्ड फाइलिंग प्रोसेस होगा।  खबर के मुताबिक, इस बदलाव के पीछे गलतियों को कम करना, टैक्स चोरी रोकना और करदाताओं के अनुपालन को आसान बनाना है। लेकिन इसका मतलब यह भी है कि अब आपको अपनी आय और कटौतियों का ज्यादा विस्तृत विवरण देना होगा।

नए ITR फॉर्म

नए नियमों के तहत सभी आईटीआर फॉर्म (ITR-1 से ITR-7) नए आयकर अधिनियम 2025 के मुताबिक, पूरी तरह रीडिजाइन किए जाएंगे। financialexpress की खबर के मुताबिक, इसमें एक खास बदलाव किया गया है कि अब आय के विभिन्न स्रोतों (सैलरी, कैपिटल गेन, अन्य स्रोत आदि) की रिपोर्टिंग ज्यादा व्यवस्थित तरीके से होगी। शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन की स्पष्ट अलग-अलग रिपोर्टिंग होगी। विदेशी संपत्ति, क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन या विशेष मामलों में अतिरिक्त डिटेल्स देनी होंगी। संपत्ति की होल्डिंग पीरियड और फेयर मार्केट वैल्यू की गणना अब और सटीक तरीके से करनी होगी।

फॉर्म 16 अब इतिहास

सैलरीड क्लास के लिए प्री-फिल्ड रिटर्न और भी ज्यादा मददगार होंगे। लेकिन निवेशक, शेयर बाजार वाले और हाई इनकम वाले करदाताओं को फॉर्म भरते समय ज्यादा सावधानी बरतनी होगी। फॉर्म 16 अब फॉर्म 130 बन गया है। फॉर्म 16 अब इतिहास हो गया। 1 अप्रैल 2026 से सैलरी पर TDS सर्टिफिकेट फॉर्म 130 के नाम से जारी होगा। 

फॉर्म 130 की संरचना को समझ लीजिए

Part A - नियोक्ता और कर्मचारी/पेंशनभोगी का पूरा विवरण

Part B - सैलरी और TDS का सारांश
Part C - कर योग्य आय की विस्तृत गणना (दो Annexure के साथ)

नए फॉर्म में क्या-क्या शामिल होगा?

  • सैलरी का पूरा ब्रेक-अप (बेसिक, HRA, अलाउंस आदि)
  • छूट और कटौतियों का डिटेल
  • कुल कर योग्य आय, देय कर, राहत और शुद्ध कर राशि
  • TDS/TCS का पूरा विवरण

यह फॉर्म सिर्फ सैलरीदारों के लिए नहीं, बल्कि पेंशनभोगियों और कुछ वरिष्ठ नागरिकों (जिनकी ब्याज आय पर TDS कटता है) के लिए भी लागू होगा।

ध्यान रहे

फॉर्म 130 अब TRACES पोर्टल से ही डाउनलोड होगा। इसे मैन्युअली जनरेट नहीं किया जा सकता। यह तभी जारी होगा जब नियोक्ता की तिमाही TDS स्टेटमेंट फाइल और प्रोसेस हो चुकी हो।

करदाताओं पर क्या असर पड़ेगा?

फाइलिंग अब ज्यादा सिस्टम-बेस्ड और ऑटोमेटेड होगी। ITR में पहले से ही ज्यादा जानकारी प्री-फिल्ड दिखेगी। गलतियां या मिसमैच जल्दी पकड़ी जाएंगी। सही डेटा होने पर रिफंड तेजी से आएगा, जबकि गलती पर प्रोसेसिंग में देरी हो सकती है।

सबसे ज्यादा प्रभावित कौन होंगे?

सैलरी क्लास कर्मचारी फॉर्म 130 और प्री-फिल्ड डेटा के कारण बदलाव महसूस करेंगे।
शेयर बाजार और प्रॉपर्टी निवेशक कैपिटल गेन की डिटेल्ड रिपोर्टिंग पर ध्यान देंगे।
NRI और हाई इनकम वालों को अतिरिक्त जानकारी देनी होगी।
वरिष्ठ नागरिक को पेंशन और ब्याज आय की एक जगह रिपोर्टिंग से फायदा होगा।

(Disclaimer: यह न्यूज सिर्फ जानकारी के लिए है। इसे प्रोफेशनल टैक्स सलाह नहीं माना जाना चाहिए। टैक्स कानूनों और नियमों में सरकार द्वारा अक्सर बदलाव किए जाते हैं। कोई भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले, आयकर विभाग की आधिकारिक अधिसूचनाओं से विवरण की पुष्टि कर लेनी चाहिए।)

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