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सिगरेट पर भारी-भरकम टैक्स से कंपनियों पर बढ़ा दबाव, मुनाफे में जबरदस्त गिरावट

 Written By: Sunil Chaurasia
 Published : Aug 02, 2026 02:31 pm IST,  Updated : Aug 02, 2026 02:31 pm IST

सरकार ने इस साल फरवरी में सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर जीएसटी को बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया था।

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सिगरेट कंपनियों के मुनाफे में भारी गिरावट Image Source : PTI

सरकार द्वारा सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर टैक्स में की गई भारी बढ़ोतरी का असर अब देश की प्रमुख सिगरेट कंपनियों के प्रदर्शन पर साफ दिखाई देने लगा है। नया टैक्स सिस्टम लागू होने के बाद चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में आईटीसी, गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया और वीएसटी इंडस्ट्रीज के शुद्ध राजस्व, बिक्री मात्रा और मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई है। इन तीनों कंपनियों की देश के सिगरेट बाजार में 90 प्रतिशत से ज्यादा की हिस्सेदारी है। बाजार के अलग-अलग अनुमानों के अनुसार, भारत में सिगरेट की सालाना खपत करीब 100-120 अरब स्टिक के आसपास है। 

सिगरेट पर 40% टैक्स के साथ एक्साइज ड्यूटी वसूल रही है सरकार

सरकार ने इस साल फरवरी में सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर जीएसटी को बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया था। इसके साथ ही पुराने मुआवजा उपकर की जगह सिगरेट की लंबाई के आधार पर नया एडिशनल एक्साइज ड्यूटी सिस्टम लागू किया गया, जो प्रति 1,000 सिगरेट पर 2,100 रुपये से 8,500 रुपये तक है। हालांकि, टैक्स में बढ़ोतरी के बाद कंपनियों की बिक्री से प्राप्त कुल आय में बढ़ोतरी दिखाई दी, लेकिन वास्तविक या शुद्ध राजस्व पर इसका नकारात्मक असर पड़ा। कंपनियों को बढ़े हुए टैक्स का बोझ कीमतों में समायोजित करने, बिक्री मात्रा बनाए रखने और प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में बदलाव करने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 

आईटीसी के वास्तविक राजस्व में 31.45% की गिरावट

देश की टॉप सिगरेट कंपनी आईटीसी ने जून तिमाही में अपने सिगरेट कारोबार से ऑपरेशनल रेवेन्यू में 73.71 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की। ये बढ़कर 16,596.67 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में ये 9,553.86 करोड़ रुपये था। कंपनी ने बताया कि टैक्स में भारी बढ़ोतरी की वजह से सिगरेट की कीमतों में किए गए बदलाव की वजह से ऑपरेशनल रेवेन्यू में वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि, उत्पादों की बिक्री से मिलने वाला वास्तविक राजस्व 31.45 प्रतिशत घटकर 3,769.11 करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में ये 5,498.93 करोड़ रुपये था। आईटीसी ने कहा कि उसकी सिगरेट यूनिट ने सभी हितधारकों के हितों को ध्यान में रखते हुए रणनीतिक और संतुलित कदम उठाए हैं। कंपनी के प्रमुख ब्रांड में इंडिया किंग्स, इंसिग्निया, क्लासिक, गोल्ड फ्लेक, विल्स नेवी कट, कैप्सटन और प्लेयर्स शामिल हैं। 

गॉडफ्रे फिलिप्स के मुनाफे में 44 प्रतिशत से भी ज्यादा की गिरावट

इस दौरान गॉडफ्रे फिलिप्स का एकीकृत शुद्ध लाभ 44.3 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 198.39 करोड़ रुपये रह गया। कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू करीब दोगुना होकर 3,819.56 करोड़ रुपये रहा, लेकिन इसमें 2,614 करोड़ रुपये की एक्साइज ड्यूटी शामिल थी। एक्साइज ड्यूटी को हटाने के बाद कंपनी का शुद्ध राजस्व 18.8 प्रतिशत घटकर 1,206 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में ये 1,486 करोड़ रुपये था। कंपनी कैवेंडर्स, फोर स्क्वायर, रेड एंड व्हाइट, स्टेलर, नॉर्थ पोल और टिपर जैसे ब्रांड के अलावा फिलिप मॉरिस के लबोरो ब्रांड की भी बिक्री करती है। 

वीएसटी इंडस्ट्रीज का प्रॉफिट 24 प्रतिशत गिरा

वीएसटी इंडस्ट्रीज पर भी नए टैक्स सिस्टम का असर पड़ा। कंपनी का जून तिमाही में राजस्व लगभग दोगुना होकर 881.49 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले साल ये 424.93 करोड़ रुपये था। हालांकि, कंपनी का शुद्ध लाभ 24.42 प्रतिशत घटकर 42.42 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल की पहली तिमाही में 56.13 करोड़ रुपये था। इतना ही नहीं, वीएसटी इंडस्ट्रीज की बिक्री भी 14 प्रतिशत घट गई। वीएसटी इंडस्ट्रीज के पास टोटल, एडिशंस और चार्म्स जैसे ब्रांड हैं।

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