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कितनी बार पुरानी से नई टैक्स व्यवस्था में आप कर सकते हैं स्विच, जानिए क्या कहता है आयकर का नियम

Edited By: Alok Kumar @alocksone Published : Apr 02, 2025 03:35 pm IST, Updated : Apr 02, 2025 03:35 pm IST

ITR Filling: वित्त वर्ष 2024-25 (AY 2025-26) के लिए ITR दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई, 2025 है।

ITR Filling - India TV Paisa
Photo:FILE आईटीआर फाइलिंग

ITR Filling: 1 अप्रैल से नया वित्त वर्ष शुरू हो गया है। इसके साथ ही न्यू इनकम टैक्स रिजीम में किया गया बदलाव लागू हो गया है। यानी अब 12 लाख रुपये तक के सालाना इनकम पर कोई टैक्स नहीं देना होगा। वहीं, नौकरीपेशा वर्ग को 75 हजार रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन का एक्स्ट्रा लाभ मिलेगा। यानी नौकरी करने वाले लोगों को 12.75 लाख रुपये तक के सालाना इनकम पर आयकर नहीं देना होगा। हालांकि, यह छूट सिर्फ न्यू टैक्स रिजीम में ही मिलेगी। अगर आप ओल्ड टैक्स रिजीम चुनते हैं तो पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी। अब सवाल उठता है कि एक व्यक्तिगत टैक्सपेयर कितनी बार पुरानी से नई कर व्यवस्था चुन सकता है। आइए जानते हैं कि आयकर का नियम क्या कहता है?

हर साल पुरानी या नई चुनने का विकल्प

भारतीय करदाताओं के पास नई और पुरानी आयकर व्यवस्थाओं के बीच स्विच करने का विकल्प है। नई कर व्यवस्था अब डिफॉल्ट विकल्प है। यानी अगर आप पुरानी कर व्यवस्था चुनना चाहेंगे तो ही आपको यह विकल्प मिलेगा। वहीं बाय डिफॉल्ट नई कर व्यवस्था मिलेगा। अब सवाल उठता है कि एक इंडिविजुअल टैक्सपेयर कितनी बार पुरानी से नई या नई से पुरानी कर व्यवस्था चुन सकता है। आपको बता दें कि हर साल व्यक्तिगत करदाता दोनों आयकर विकल्प में से किसी का भी चयन कर सकता है, बशर्ते कि यह विकल्प आयकर अधिनियम की धारा 139(1) के तहत उल्लिखित कर रिटर्न दाखिल करने की नियत तारीख से पहले चुना गया हो।

बिजनेस करने वाले को एक ही मौका मिलेगा

जिन लोगों की आय व्यवसाय या पेशेवर स्रोतों से होती है, उनके लिए नियम ज्यादा कड़े हैं। एक बार जब वे नई कर व्यवस्था से बाहर निकल जाते हैं, तो उनके पास पुरानी व्यवस्था में वापस जाने का सिर्फ एक ही मौका होगा और यह विकल्प भी धारा 139(1) के तहत दाखिल करने की समय-सीमा से पहले ही तय हो जाना चाहिए। आयकर विभाग के अनुसार, गैर-व्यवसायिक आय वाला व्यक्ति सालाना नई और पुरानी कर व्यवस्थाओं के बीच स्विच कर सकता है। नई कर व्यवस्था को डिफॉल्ट बनाने का कदम भारत की कर नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव है, जिसका उद्देश्य कर प्रणाली को सरल बनाना है। नई व्यवस्था कम कर दरें प्रदान करती है, लेकिन अधिकांश कटौती और छूट को समाप्त कर देती है, जो पुरानी व्यवस्था के विपरीत है, जो क्रमशः निवेश और बीमा प्रीमियम को कवर करते हुए 80C और 80D जैसी धाराओं के तहत विभिन्न कटौती की अनुमति देती है। ये परिवर्तन कर अनुपालन को सुव्यवस्थित करने और करदाताओं के लिए प्रशासनिक बोझ को कम करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा हैं। 

ITR फाइलिंग 2025

वित्त वर्ष 2024-25 (AY 2025-26) के लिए ITR दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई, 2025 है। हालांकि, यदि आप नियत तिथि के भीतर दाखिल करने से चूक जाते हैं, तो भी आप 31 दिसंबर, 2025 से पहले विलंबित रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। अपना 2025 आयकर रिटर्न (ITR) भरते समय, एक महत्वपूर्ण निर्णय यह लेना है कि पुरानी या नई कर व्यवस्था को चुनना है या नहीं। इस विकल्प का आपकी कर देयता पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा, जिससे असमानताओं को पूरी तरह से समझना अनिवार्य है।

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