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पंजाब में आप, कांग्रेस, अकाली दल ने ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ प्रस्ताव का विरोध किया, संविधान के मूल ढांचे पर बताया हमला

 Edited By: Niraj Kumar
 Published : Jun 15, 2025 02:53 pm IST,  Updated : Jun 15, 2025 02:53 pm IST

चंडीगढ़ में जेपीसी की बैठक में भाग लेने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने प्रस्ताव को डॉ. भीम राव अंबेडकर द्वारा बनाए गए भारत के संविधान की मूल संरचना और भावना पर सीधा हमला बताया।

Harpal Singh Cheema- India TV Hindi
हरपाल सिंह चीमा Image Source : FILE

चंडीगढ़: सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) और विपक्षी कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब में पीपी चौधरी की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के साथ बैठक के दौरान ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई है। शनिवार को चंडीगढ़ में जेपीसी की बैठक में भाग लेने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और आप के प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा ने प्रस्ताव को डॉ. भीम राव अंबेडकर द्वारा बनाए गए भारत के संविधान की मूल संरचना और भावना पर सीधा हमला बताया।

क्षेत्रीय पार्टियों को खत्म करने की साजिश

चीमा ने कहा कि पंजाब सरकार और आप ने प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और इसे लिखित रूप में भी देंगे, उन्होंने कहा, “भाजपा द्वारा वन नेशन वन इलेक्शन  विधेयक, विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं और क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाली क्षेत्रीय पार्टियों को खत्म करने की एक सोची-समझी चाल है, जो भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ की हड्डी हैं।”

उन्होंने कहा कि यदि विधेयक पारित हो जाता है, तो राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल केंद्र सरकार के विवेक पर निर्भर हो जाएगा। चीमा ने कहा कि विधेयक केंद्र सरकार द्वारा अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) और 360 (वित्तीय आपातकाल) के दुरुपयोग को और बढ़ावा देगा। राज्य के वित्त मंत्री ने कहा कि यह अवधारणा अंततः उल्टी पड़ेगी क्योंकि इससे केंद्र को आम चुनावों के एक या दो साल बाद अपनी सुविधानुसार राज्य चुनाव कराने का मौका मिल जाएगा।

संविधान की मूल अवधारणा के खिलाफ

पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीपीसीसी) के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग और विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भी कहा कि यह प्रस्ताव भारत के संविधान द्वारा गारंटीकृत संघवाद की मूल अवधारणा के खिलाफ है। इस बात की ओर इशारा करते हुए कि संसदीय और विधानसभा चुनाव पूरी तरह से अलग-अलग मुद्दों पर होते हैं, वारिंग ने कहा, "संसद और राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराने का विचार एक तरह से तानाशाही लागू करना होगा।"

पीपीसीसी प्रमुख ने कहा कि विधानसभा चुनावों के दौरान प्रमुखता पाने वाले क्षेत्रीय और स्थानीय मुद्दों को नजरअंदाज कर दिया जाएगा और उन्हें कुचल दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय और स्थानीय आकांक्षाओं को दबा दिया जाएगा।

शिरोमणि अकाली दल ने अनुच्छेद 356 को समाप्त करने की मांग की

इस बीच, शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने जेपीसी से अनुच्छेद 356 को समाप्त करने की सिफारिश करने का आग्रह किया, जो राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुमति देता है, और कहा कि यह देश में एक साथ चुनाव कराने में व्यवधान का मूल कारण है। डॉ. दलजीत सिंह चीमा और बलविंदर सिंह भूंदड़ के नेतृत्व में शिअद प्रतिनिधिमंडल ने जेपीसी को बताया कि यदि अनुच्छेद 356 को समाप्त नहीं किया गया, तो चुनाव कार्यक्रम फिर से बाधित हो जाएगा।

प्रतिनिधिमंडल ने अनुच्छेद 82 ए, खंड 5 को शामिल करने का भी विरोध किया, जो भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) को विधानसभाओं के चुनाव स्थगित करने का अधिकार देता है। उन्होंने जोर देकर कहा, "इसका कभी भी विपक्षी दलों के खिलाफ दुरुपयोग किया जा सकता है।"

डॉ. दलजीत सिंह चीमा और बलविंदर सिंह भूंदड़ ने लगातार उपचुनावों के समाधान की भी मांग की। उन्होंने कहा कि उपचुनाव चुनावी गड़बड़ियों का मूल कारण बन रहे हैं, तथा उन्होंने प्रस्ताव दिया कि यदि किसी विधायक की मृत्यु हो जाती है, तो पार्टी को शेष अवधि के लिए किसी अन्य नेता को नामित करने का अधिकार दिया जाना चाहिए।

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