Highlights
- चंडीगढ़ बॉर्डर पर किसानों का 7 सितंबर तक धरना, 32 संगठनों ने आंदोलन तेज किया।
- पंजाब के पानी अधिकारों पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की किसान संगठनों ने मांग की।
- 22 फसलों के MSP की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी और फसल बीमा की मांग उठी।
चंडीगढ़: पंजाब के किसानों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर चंडीगढ़ बॉर्डर पर आंदोलन तेज कर दिया है। बड़ी संख्या में किसान मंगलवार को चंडीगढ़ बॉर्डर पहुंचे। संयुक्त किसान मोर्चा यानी कि SKM की ओर से 1 सितंबर से 7 सितंबर तक एक सप्ताह का धरना दिया जा रहा है। किसानों ने एयरपोर्ट रोड के पास धरना शुरू किया है और उनकी प्रमुख मांगों में 22 फसलों पर MSP की कानूनी गारंटी शामिल है। किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस ने सुरक्षा और ट्रैफिक को लेकर व्यापक इंतजाम किए हैं। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी तैयारियां की हैं।
'मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन होगा तेज'
भारतीय किसान यूनियन (BKU) लखोवाल के वरिष्ठ नेता हरिंदर सिंह लखोवाल ने कहा कि 32 किसान संगठनों के गठबंधन ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने का फैसला किया है। किसान लंबे समय से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी और दशकों पुराने जल समझौतों को रद्द करने सहित कई मांगें उठा रहे हैं। लखोवाल ने कहा कि किसान संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर कई स्तर पर ज्ञापन दिए हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा,
'हम 32 किसान संगठनों का गठबंधन हैं। हमने अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से आवाज उठाई है। राज्यपाल, मुख्यमंत्री, एसडीएम और डीसी समेत कई अधिकारियों को ज्ञापन दिए हैं। करीब साढ़े चार साल हो गए हैं, लेकिन कोई हमारी बात सुनने को तैयार नहीं है और हमारी मांगें अब भी पूरी नहीं हुई हैं।'
पंजाब सरकार से विशेष सत्र बुलाने की मांग
किसान नेता ने पंजाब के पानी के अधिकार के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने पंजाब सरकार से इस मामले पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की। लखोवाल ने कहा कि किसान संगठन दो-तीन साल पहले भी यही मुद्दे उठा चुके हैं। उस समय कुछ मांगों पर सहमति बनी थी, लेकिन खास तौर पर पानी से जुड़े मामलों में फैसलों को लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा,
'हमने ये मुद्दे 2-3 साल पहले भी उठाए थे। उस समय सरकार ने कुछ मांगें मानने की बात कही थी, लेकिन उन्हें लागू नहीं किया गया, खासकर पानी के मामले में। पंजाब सरकार शायद यह कह सकती है कि यह उसकी जिम्मेदारी नहीं है और केंद्र सरकार को इस पर फैसला करना है। लेकिन हम चाहते हैं कि पंजाब सरकार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर इस मुद्दे का विरोध करे। सरकार को पुराने जल समझौतों को रद्द करने की मांग करनी चाहिए। आखिर इन समझौतों को हुए 25 साल हो चुके हैं।'
22 फसलों पर MSP की कानूनी गारंटी की मांग
किसानों की प्रमुख आर्थिक मांगों में केंद्र सरकार की ओर से घोषित 22 फसलों के MSP को कानूनी गारंटी देना भी शामिल है। किसान संगठनों का कहना है कि सिर्फ MSP घोषित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों को इसकी कानूनी गारंटी मिलनी चाहिए। लखोवाल ने कहा,
'केंद्र सरकार की ओर से 22 फसलों के लिए MSP घोषित किया जाता है। हमारी मांग है कि इसे कानूनी गारंटी दी जाए।'
लखोवाल ने यह भी कहा कि किसान संगठन प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन के लिए तैयार हैं। उन्होंने दावा किया कि इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग जगहों पर पहले से ही प्रदर्शन हो रहे हैं।
कर्ज माफ करने और बेहतर फसल बीमा की मांग
किसान नेता ने किसानों के कर्ज का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि अगर बड़ी कंपनियों पर लाखों करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया जा सकता है, तो किसानों के कर्ज को लेकर ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा,
'अगर बड़ी कंपनियों का लाखों करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया जा सकता है, तो किसानों का कर्ज क्यों नहीं माफ किया जा सकता? हमारी मांग है कि किसानों के लिए एक सही और प्रभावी फसल बीमा योजना लागू की जाए।'
किसान संगठनों का कहना है कि MSP की कानूनी गारंटी, कर्ज से राहत, बेहतर फसल बीमा और पंजाब के पानी के अधिकार जैसे मुद्दों पर सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। बता दें कि किसानों ने इससे पहले अप्रैल में भी पंजाब ने रेल रोको आंदोलन किया था।
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