राजस्थान के सिरोही जिले में एक छात्रावास में बच्चों के साथ कथित यौन शोषण का सनसनी खेज मामला सामने आया है। ईमेल के जरिए मिली शिकायत के बाद प्रशासन और पुलिस हरकत में आ गए हैं। शिकायत के आधार पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और बाल कल्याण समिति की संयुक्त टीम ने छात्रावास का निरीक्षण किया, जहां पढ़ रहे कई छात्रों ने अपने साथ हुए दुराचार की बातें बताई हैं।
जब इन छात्रों को मेडिकल कराने के लिए अस्पताल ले जाया गया तो डॉक्टर ने 10 कैन बीयर की मांग की। पुलिस ने उसे समझाकर मेडिकल कराया और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव से डॉक्टर की शिकायत भी की गई है।
कई पहलुओं पर जांच कर रही पुलिस
प्रारंभिक जांच के दौरान सबसे गंभीर तथ्य छात्रों के साथ यौन दुराचार का आया हैं। इसके साथ ही यह तथ्य भी सामने आया कि संबंधित छात्रावास का आवश्यक पंजीकरण तक नहीं हैं। इसके अलावा बच्चों की सुरक्षा और संस्थान के संचालन से जुड़े कई पहलुओं की भी जांच की जा रही है। जानकारी के अनुसार, मामले की शुरुआत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को ईमेल के माध्यम से मिली एक शिकायत से हुई। शिकायत की जांच आगे बढ़ने पर कथित रूप से एक से अधिक बच्चों के प्रभावित होने की बात सामने आई, जिसके बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया।
बाल कल्याण समिति ने कराई रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच टीम ने छात्रावास से दो कंप्यूटर जब्त कर पुलिस को सौंप दिए हैं। इसके साथ ही पिछले दिनों के सीसीटीवी फुटेज भी जांच के लिए सुरक्षित किए गए हैं, ताकि घटनाक्रम की निष्पक्ष पड़ताल की जा सके। बाल कल्याण समिति की ओर से पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई गई है। वहीं, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले की निगरानी के निर्देश देते हुए कहा है कि जांच सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर की जाएगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
शराब दुकान बंद होने पर नहीं मिली बीयर
बाल कल्याण समिति और पुलिस की टीम पीड़ित छात्रों का मेडिकल परीक्षण कराने शुक्रवार रात जिला अस्पताल पहुंची तो ड्यूटी पर तैनात एमएलसी डॉक्टर ने मेडिकल से पहले 10 कैन बीयर की मांग की। बाल कल्याण समिति के सदस्य प्रताप सिंह नून ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि डॉक्टर ने कथित रूप से मेडिकल परीक्षण करने से पहले 10 कैन बीयर लाने की शर्त रखी। पुलिसकर्मियों ने शराब की दुकानें बंद होने की बात कहते हुए काफी देर तक डॉक्टर से समझाइश की, जिसके बाद पीड़ित छात्रों का मेडिकल परीक्षण किया गया। प्रताप सिंह नून ने इस पूरे मामले की शिकायत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव से भी की है। उनका कहना है कि यदि नाबालिग पीड़ितों के साथ भी इस प्रकार का व्यवहार किया जा रहा है, तो यह अत्यंत गंभीर और चिंताजनक विषय है। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
(सिरोही से विक्रमसिंह करणोत की रिपोर्ट)
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