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चर्चित इन्फ्लुएंसर पवन साहू की पत्नी सरपंच चुनाव में हारीं, मिले सिर्फ 277 वोट; सोशल मीडिया पर हैं करोड़ों फॉलोअर्स

 Written By: Mangal Yadav
 Published : Oct 31, 2026 10:55 am IST,  Updated : Oct 31, 2026 12:19 pm IST

इन्फ्लुएंसर पवन साहू की पत्नी सरपंच का चुनाव हार गई हैं, उन्हें केवल 277 वोट मिले। इस नतीजे से एक बार फिर यह साफ हो गया है कि ऑनलाइन लाखों फॉलोअर्स होने का मतलब यह नहीं है कि आपको चुनाव में वोट भी मिलेंगे।

इन्फ्लुएंसर पवन साहू और उनकी पत्नी कोमल- India TV Hindi
इन्फ्लुएंसर पवन साहू और उनकी पत्नी कोमल Image Source : REPORTER

भीलवाड़ा: सोशल मीडिया पर करोड़ों लोगों के बीच लोकप्रिय राजस्थान के चर्चित इन्फ्लुएंसर पवन साहू की पत्नी को भीलवाड़ा जिले की फुलिया कला ग्राम पंचायत मुख्यालय पर शुक्रवार को हुए सरपंच पद के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। पवन साहू की पत्नी को केवल 277 वोट मिले।

तीसरे नंबर पर रहीं कोमल

पंचायत राज चुनाव के दूसरे चरण में भीलवाड़ा जिले की 185 ग्राम पंचायत मुख्यालय पर शुक्रवार को सरपंच व वार्ड पंच पद के लिए मतदान हुआ था जहां शनिवार सुबह तक सरपंच व वार्ड पंच पद के लिए चुनाव परिणाम घोषित हुए थे। इस चुनाव में अधिकतर प्रत्याशियों ने सोशल मीडिया के जरिए प्रचार का सहारा लिया ऐसे में भीलवाड़ा जिले की शाहपुरा तहसील के फूलिया कलां ग्राम पंचायत से सरपंच पद के लिए देश में प्रसिद्ध सोशल मीडिया के इन्फ्लुएंसर्स पवन साहू की पत्नी कोमल साहू को महज 277 वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहीं। जबकि भगवती लाल सोनी ने 1203 मत प्राप्त कर फुलिया कला ग्राम पंचायत के सरपंच चुने गए व दूसरे स्थान पर कालूराम जाट ने 797 मत हासिल किये।

पवन साहू के सोशल मीडिया पर करोड़ों फॉलोवर्स

फुलिया कला ग्राम पंचायत के रहने वाले पवन साहू के यूट्यूब पर करीब 2 करोड़ 77 लाख व इंस्टाग्राम पर 70 लाख और फेसबुक पर 30 लाख फॉलोअर्स बताए जा रहे हैं। इसके बावजूद सोशल मीडिया की यह लोकप्रियता मतपेटी तक वोटों में तब्दील नहीं हो सकी। वहीं चुनाव प्रचार के दौरान राजस्थान के कई बड़े सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने वीडियो बनाकर पवन साहू की पत्नी के समर्थन में वोट देने की अपील भी की थी। पवन साहू ने अपने स्तर पर गांव में हैंडपंप और ट्यूबवेल लगवाने जैसे कार्य किए और लोगों से घर बनवाने में मदद करने की अपील भी की, लेकिन मतदाताओं ने उनकी पत्नी को सरपंच बनाने का मौका नहीं दिया।

साहू की पत्नी की हार ने सोशल मीडिया की लोकप्रियता और ज़मीनी स्तर पर मिलने वाले जनसमर्थन के बीच के अंतर पर चर्चा छेड़ दी है। इस नतीजे से एक बार फिर यह साफ हो गया है कि ऑनलाइन लाखों फॉलोअर्स होने का मतलब यह नहीं है कि आपको चुनाव में वोट भी मिलेंगे। सरपंच पद के लिए हुए चुनाव ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सोशल मीडिया पर लाखों-करोड़ों फॉलोअर्स होना और जमीनी स्तर पर जनता का विश्वास हासिल करना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।

इनपुटः सोमदत्त त्रिपाठी

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