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Chanakya Neeti: धोखा मिलने या नुकसान होने का खतरा रहता है कम, चाणक्य की ये सीख आपको बनाएगी सफल और सम्मानित

 Written By: Arti Azad
 Published : Apr 08, 2026 08:15 pm IST,  Updated : Apr 08, 2026 08:15 pm IST

चाणक्य नीति में बताई गई एक ऐसी आदत, जो देखने में साधारण लगती है, लेकिन जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है। यह गुण न केवल आपके व्यक्तित्व को निखारता है, बल्कि सफलता और सम्मान पाने में भी अहम भूमिका निभाता है।

आचार्य चाणक्य ने बताएं कम बोलने के फायदे- India TV Hindi
आचार्य चाणक्य ने बताएं कम बोलने के फायदे Image Source : INDIA TV

चाणक्य को इतिहास के एक महान विद्वान ही नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा दिखाने वाले मार्गदर्शक के रूप में भी जाना जाता है। उनकी नीतियां आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने व्यवहार और सफलता को लेकर जो बातें बताई हैं, उनमें 'कम बोलना' एक बेहद अहम गुण माना गया है। चाणक्य के अनुसार, कम बोलना व्यक्ति को न केवल मानसिक रूप से मजबूत बनाता है, बल्कि उसे सफलता, सम्मान और बेहतर निर्णय लेने की क्षमता भी देता है। तो आइए जानते हैं चाणक्य के अनुसार कम बोलने की ताकत आपको कैसे सफलता और सम्मान दिला सकती है। 

कम शब्द, ज्यादा असर

चाणक्य का मानना है कि जो लोग कम बोलते हैं, उनकी बातें ज्यादा असरदार होती हैं। वे बेवजह की बातचीत से दूर रहते हैं और जब भी कुछ कहते हैं, तो उसका महत्व होता है। इससे उनकी बातों की वैल्यू बढ़ती है। ज्यादा बोलने में व्यक्ति अपनी ऊर्जा खर्च कर देता है, जबकि कम बोलने वाला इंसान उसी ऊर्जा को अपने काम और लक्ष्यों पर लगाता है। यही वजह है कि ऐसे लोग अपने करियर और जीवन में तेजी से आगे बढ़ते हैं।

बोलने से पहले सोचने की आदत
कम बोलने वाले लोग हर परिस्थिति को समझने के बाद ही प्रतिक्रिया देते हैं। वे भावनाओं में बहकर कुछ भी नहीं कहते, बल्कि सोच-समझकर बोलते हैं। यही आदत उन्हें समझदार और परिपक्व बनाती है। अक्सर ज्यादा बोलने से विवाद और गलतफहमियां पैदा होती हैं। वहीं, शांत रहने वाले लोग इन स्थितियों से काफी हद तक बचे रहते हैं। वे स्थिति को समझकर ही अपनी बात रखते हैं, जिससे टकराव की संभावना कम हो जाती है।

गोपनीयता ही असली ताकत
चाणक्य के अनुसार, अपनी योजनाओं को हर किसी के सामने उजागर करना समझदारी नहीं है। कम बोलने वाले लोग अपनी रणनीतियों को सीमित रखते हैं, जिससे उन्हें नुकसान होने की आशंका कम रहती है।

कब चुप रहना है ये समझना जरूरी
हर परिस्थिति में बोलना जरूरी नहीं होता। कई बार चुप रहना ही सबसे सही फैसला होता है, खासकर तब जब सामने वाला व्यक्ति सुनने या समझने की स्थिति में न हो। जो लोग कम बोलते हैं, उन्हें समाज में अधिक सम्मान मिलता है। उनकी बातों को लोग ध्यान से सुनते हैं और उन्हें गंभीरता से लेते हैं। यही गुण उन्हें भीड़ से अलग पहचान दिलाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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