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हंस जैसे स्वभाव वाले कभी नहीं निभाते रिश्ते, ऐसे लोगों से सावधान रहने की सलाह देती है चाणक्य नीति

 Written By: Arti Azad
 Published : May 07, 2026 09:19 pm IST,  Updated : May 07, 2026 09:19 pm IST

Chanakya Niti: चाणक्य नीति में हंस के स्वभाव के जरिए स्वार्थी लोगों की पहचान बताई गई है। आचार्य चाणक्य के अनुसार जो लोग सिर्फ अच्छे समय में साथ रहते हैं, उनसे सावधान रहना चाहिए। चाणक्य नीति से जानिए कैसे स्वार्थी लोगों की पहचान करें।

Chanakya Niti- India TV Hindi
चाणक्य नीति से करें स्वार्थी लोगों की पहचान Image Source : INDIA TV

Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य द्वारा रचित चाणक्य नीति आज भी जीवन प्रबंधन, रिश्तों और सफलता के लिए बेहद उपयोगी मानी जाती है। इस ग्रंथ में इंसान के स्वभाव, मित्रता, व्यवहार और जीवन के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को सरल उदाहरणों के जरिए समझाया गया है। चाणक्य ने कई जानवरों और पक्षियों के गुणों का उल्लेख करते हुए यह बताया है कि व्यक्ति को किन आदतों को अपनाना चाहिए और किनसे बचना चाहिए।

जीवन को बेहतर बनाने में चाणक्य नीति का महत्व

आचार्य चाणक्य द्वारा रचित चाणक्य नीति एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें जीवन को बेहतर बनाने के कई सूत्र बताए गए हैं। यह ग्रंथ राजनीति, अर्थशास्त्र, रिश्तों और नैतिकता की सीख देता है। आज भी लोग अपने व्यक्तिगत और प्रोफेशनल जीवन में चाणक्य की नीतियों को अपनाते हैं।

हंस के स्वभाव से क्या सीख मिलती है

चाणक्य नीति में हंस का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि हंस केवल वहीं रहता है जहां पानी होता है। जैसे ही पानी सूख जाता है, वह उस स्थान को छोड़ देता है। आचार्य चाणक्य इसी उदाहरण के जरिए बताते हैं कि कुछ लोग भी केवल अपने स्वार्थ और फायदे के लिए रिश्ते निभाते हैं।

अच्छे समय में साथ, मुश्किल में दूरी

आचार्य चाणक्य के अनुसार कई लोग तब तक साथ रहते हैं, जब तक व्यक्ति के पास पैसा, सफलता और ताकत होती है। लेकिन जैसे ही कठिन समय आता है, वही लोग दूरी बनाना शुरू कर देते हैं। ऐसे लोग कभी सच्चे मित्र या शुभचिंतक नहीं हो सकते।

स्वार्थी स्वभाव से बचने की सलाह

श्लोक: यत्रोदकं तत्र वसन्ति हंसाः तथैव शुष्कं परिवर्जयन्ति। न हंसतुल्येन नरेण भाव्यं पुनस्त्यजन्तः पुनराश्रयन्ते ॥

यह श्लोक केवल दूसरों को पहचानने की ही नहीं, बल्कि खुद के व्यवहार को सुधारने की भी सीख देता है। चाणक्य कहते हैं कि इंसान को कभी स्वार्थी नहीं बनना चाहिए और ना ही घमंड करना चाहिए। रिश्तों की असली परीक्षा कठिन समय में होती है।

सच्चे रिश्तों की पहचान

चाणक्य नीति के अनुसार वही रिश्ते सच्चे कहलाते हैं, जो सुख और दुख दोनों में साथ निभाते हैं। जो लोग बार-बार अपने फायदे के हिसाब से रिश्ते बनाते और तोड़ते हैं, वे कभी भरोसा नहीं जीत पाते। इसलिए जीवन में ऐसे संबंध बनाने चाहिए, जिनमें अपनापन, विश्वास और निस्वार्थ भावना हो।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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