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Chanakya Niti: बच्चों को जो माता-पिता नहीं सिखाते ये 3 चीजें, चाणक्य मानते हैं उन्हें संतान का शत्रु

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Mar 07, 2025 01:00 pm IST,  Updated : Mar 07, 2025 01:00 pm IST

Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य के अनुसार कुछ ऐसी चीजें हैं जो हर माता पिता को अपने बच्चों को जरूरी सिखानी चाहिए। आज इसी के बारे में हम आपको अपने इस लेख में जानकारी देंगे।

Chanakya Niti- India TV Hindi
चाणक्य नीति Image Source : FILE

 Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में कई शिक्षाएं दी हैं। उनके द्वारा दी गई शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक और अर्थपूर्ण हैं जितनी उनके समय में थी। जीवन के लगभग हर पक्ष को नीति शास्त्र में आचार्य चाणक्य ने छुआ है। उन्होंने नीति शास्त्र में यह भी बताया है कि माता पिता को कैसा होना चाहिए और अपनी संतान को क्या चीजें उन्हें अवश्य देनी चाहिए। चाणक्य के अनुसार कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें माता-पिता अपने बच्चे को नहीं देते तो वो बच्चों के दुश्मन से कम नहीं होते। आइए जानते हैं इन चीजों के बारे में। 

बच्चों को शिक्षा ना देने वाले माता-पिता शत्रु के समान 

आचार्य चाणक्य नीति शास्त्र में कहते हैं कि अगर कोई माता-पिता बच्चे को उचित शिक्षा नहीं देते तो वो बच्चे के शत्रु होते हैं। अशिक्षित व्यक्ति हमेशा समाज में तिरस्कृत होता है और विद्वान लोगों के बीच उसकी कोई पूछ नहीं होती। आचार्य चाणक्य ने अनपढ़ व्यक्ति को हंसों के बीच बगुले की तरह बताया है। इसलिए हर माता-पिता को शिक्षा अपने बच्चों को अवश्य देनी चाहिए ताकि वो समाज में सकारात्मक रूप से योगदान दे सके। 

सत्य और विनम्रता

माता-पिता को बचपन में ही बच्चों को सत्य और विनम्रता का पाठ पढ़ना चाहिए। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि ये वो चीजें हैं जिनका बीज बचपन में ही पड़ता है। इसलिए हर अभिभावक को सत्य और विनम्रता अपने बच्चे को अवश्य सिखानी चाहिए। अगर सत्य और विनम्रता किसी व्यक्ति में नहीं है तो वो समाज का हित नहीं बल्कि अहित करता है। 

सब का सम्मान करना 

माता-पिता का यह दायित्व होता है कि वो बच्चों को सब का सम्मान करना सिखाएं। जो माता-पिता अपने बच्चे को यह गुण नहीं देते वो समाज में दूसरों में कमियां निकालने का काम करता है और इससे दूसरे की नहीं बल्कि उसकी मान हानि होती है। दूसरों का सम्मान न करने वाला व्यक्ति न केवल अपना बल्कि अपने परिवार का नाम भी खराब करता है। 

आलस्य न करना 

आलस्य को व्यक्ति का शत्रु माना जाता है। इसलिए माता पिता को अपने बच्चे को आलस्य से दूर रखना चाहिए। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि बच्चा आलस्य से दूर रहे इसलिए माता-पिता को उसके सामने सक्रिय रहना चाहिए, क्योंकि बच्चा वही सीखता है जो देखता है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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