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Dhanteras 2025 Dhanvantri Puja Vidhi, Mantra, Aarti: धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा कैसे करें, यहां जानिए इनकी पूजा विधि, मंत्र, मुहूर्त और आरती लिरिक्स

Dhanteras 2025 Dhanvantri Puja Vidhi, Mantra, Aarti: धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं इनकी पूजा से अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। चलिए आपको बताते हैं भगवान धन्वंतरि की पूजा विधि क्या है।

Written By: Laveena Sharma @laveena1693
Published : Oct 18, 2025 09:07 am IST, Updated : Oct 18, 2025 09:09 am IST
dhanteras- India TV Hindi
Image Source : CANVA धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा कैसे करें

Dhanteras 2025 Dhanvantri Puja Vidhi, Mantra, Aarti: भगवान धन्वंतरि को आरोग्य का देवता माना जाता है और धनतेरस के दिन इनकी पूजा जरूर की जाती है। कहते हैं कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर यानी धनतेरस के दिन ही भगवान धन्वंतरि का अवतरण हुआ था। इस दिन धन्वंतरि जी हाथ में अमृत का कलश लेकर समुद्र मंथन से निकले थे। इसलिए धनतेरस पर माता लक्ष्मी के साथ इनकी पूजा का भी विशेष महत्व माना गया है। चलिए जानते हैं भगवान धन्वंतरि की पूजा विधि।

भगवान धन्वंतरि की पूजा विधि (Bhagwan Dhanavantri Ki Puja Vidhi In Hindi)

  • एक लकड़ी का साफ पटरा लें और उस पर लाल या पीले रंग का साफ कपड़ा बिछाएं।
  • फिर उस पर धन्वंतरि जी की मूर्ति रखें। साथ में कुबेर देवता और माता लक्ष्मी की भी प्रतिमा रखें।
  • अब घी का दीपक जलाएं। भगवान को तिलक लगाएं और फूल अर्पित करें।
  • इसके बाद भगवान धन्वंतरि से अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।
  • भगवान धन्वंतरि की पूजा के दौरान 'ॐ नमो भगवते धन्वंतराय विष्णुरूपाय नमो नमः' का जाप जरूर करते रहें।
  • अंत में भगवान की आरती करें और उन्हें भोग लगाएं।

धनतेरस पूजा मुहूर्त 2025 (Dhantears Puja Muhurat 2025)

धनतेरस के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 07:16 से रात 08:20 बजे तक रहेगा।

धन्वंतरि भगवान पूजा मंत्र (Dhanvantari Bhagwan Puja Mantra)

  • ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये:
  • अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोगनिवारणाय
  • त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप
  • श्री धनवंतरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः॥

धन्वंतरि भगवान की आरती (Dhanvantari Bhagwan ki Aarti)

  • ॐ जय धन्वन्तरि देवा, स्वामी जय धन्वन्तरि जी देवा।
  • जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा।।
  • स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा ॥
  • तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए।
  • देवासुर के संकट आकर दूर किए।।
  • स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥
  • आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया।
  • सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया।।
  • स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥
  • भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी।
  • आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी।।
  • स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥
  • तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे।
  • असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे।।
  • स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥
  • हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा।
  • वैद्य-समाज तुम्हारे चरणों का घेरा।।
  • स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥
  • धन्वंतरिजी की आरती जो कोई नर गावे।
  • रोग-शोक न आए, सुख-समृद्धि पावे।।
  • स्वामी जय धन्वन्तरि देवा, ॐ जय धन्वन्तरि जी देवा॥

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