1. Hindi News
  2. धर्म
  3. त्योहार
  4. शनिवार को गोगा नवमी पर पूजे जाएंगे नागों के देवता, जानिए क्यों मनाया जाता है ये पर्व और क्या है पूजन विधि

शनिवार को गोगा नवमी पर पूजे जाएंगे नागों के देवता, जानिए क्यों मनाया जाता है ये पर्व और क्या है पूजन विधि

 Written By: Arti Azad
 Published : Sep 04, 2026 05:38 pm IST,  Updated : Sep 04, 2026 06:02 pm IST

भाद्रपद कृष्ण पक्ष की नवमी को मनाई जाने वाली गोगा नवमी गोगाजी महाराज को समर्पित है। इस दिन नाग पूजन के साथ गोगाजी की आराधना की जाती है। महिलाएं संतान की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। जानिए इसका महत्व और क्या है पूजा विधि।

goga navami- India TV Hindi
क्यों मनाया जाता है गोगा नवमी का पर्व Image Source : PINTEREST

भारत में त्योहारों की परंपरा जितनी समृद्ध है, उतनी ही अनोखी भी। कुछ पर्व देशभर में धूमधाम से मनाए जाते हैं, तो कुछ खास क्षेत्रों और समुदायों की आस्था से गहराई से जुड़े होते हैं। गोगा नवमी (Goga Navami) भी ऐसा ही एक लोकपर्व है। राजस्थान से लेकर हरियाणा और पंजाब तक इस पर्व की खास मान्यता है। आइए जानते हैं गोगा नवमी क्यों मनाई जाती है और इस दिन किस तरह से पूजा की जाती है।

लोकदेवता गोगाजी

गोगा नवमी भाद्रपद कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाती है। जो इस साल 5 सितंबर, शनिवार को है, गोगा नवमी के शुभ मुहूर्त भी जानिए। यह पर्व राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में विशेष रूप से लोकप्रिय है। गोगाजी को नागों के देवता के रूप में पूजा जाता है। उन्हें जाहरवीर गोगा राणा और जाहरपीर गोगाजी के नाम से भी जाना जाता है। योग, तप और मंत्र साधना से मिली सिद्धियों के कारण उन्हें राजस्थान के प्रमुख लोकदेवताओं में स्थान मिला।

गोगा नवमी की पूजा विधि

  • इस दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और गोगाजी का ध्यान करते हुए व्रत और पूजा का संकल्प लें।
  • घर की रसोई की दीवार पर हल्दी और चंदन से गोगाजी का प्रतीक बनाया जाता है। 
  • इसमें तवे की कालिख या कोयले से रंग भरने की परंपरा है।
  • कई जगह महिलाएं मिट्टी से वीर गोगाजी की प्रतिमा बनाते हैं, तो कहीं घोड़े पर सवार गोगाजी की मूर्ति का पूजन होता है।
  • जांटी की टहनी या गोगा के नाम से पहचाने जाने वाले पौधे की पूजा करते हैं। 
  • गोगादेव को खीर, चूरमा और गुलगुले जैसे पकवानों का भोग लगाया जाता है।
  • इस दिन नागों की पूजा की भी परंपरा है। पूजा के दौरान परिवार की रक्षा और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।
  • जिन स्थानों पर घोड़े पर सवार गोगाजी के स्वरूप की पूजा होती है, वहां घोड़े को दाल खिलाने की परंपरा भी है।
  • मान्यता के अनुसार रक्षाबंधन पर भाई की कलाई में बांधी गई राखी गोगा नवमी के दिन उतारकर गोगाजी को अर्पित की जाती है। इसके साथ भाई और परिवार की रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पौधे से जुड़ी मान्यता

गोगा नवमी की पूजा में पौधे की भी खास भूमिका बताई है। खेतों में खर-पतवार के रूप में उगने वाले जांटी के पौधे की टहनी या गोगा नाम से पहचाने जाने वाले पौधे को घर लाकर पूजा करने की परंपरा है। इसे गोगाजी के प्रतीक माना जाता है। पूजा के बाद शाम के समय इस टहनी या पौधे को नदी या तालाब में प्रवाहित किया जाता है।

हरियाणा में गोगा के पौधो को आमतौर पर अपामार्ग, लटजीरा या चिरचिटा के नाम से जाना जाता है। इसमें कई औषधीय गुण पाए जाते हैं। इसी कारण स्थानीय परंपरा में इसे गोगा नवमी से जोड़कर देखा जाता है और इसकी पूजा करते हैं।

संतान के लिए व्रत

गोगा नवमी पर महिलाएं संतान की लंबी उम्र, सुख और परिवार की समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं। संतान की इच्छा रखने वाले दंपति भी गोगाजी की पूजा करके मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ गोगाजी का पूजन करने से भक्तों की इच्छाएं पूरी होती हैं।

लोक आस्था का पर्व

गोगा नवमी लोक आस्था का पर्व है। राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के गोगामेड़ी में गोगाजी का प्रसिद्ध मंदिर है। गोगा नवमी पर यहां बड़े मेले का आयोजन होता है। इस दौरान गोगाजी की छड़ी का भी विशेष महत्व रहता है। भक्त इसे कंधे पर रखकर नगर में प्रभातफेरी निकालते हैं, जो इस पर्व की विशेष पहचान हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में यह पर्व स्थानीय परंपराओं के अनुसार मनाते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

ये भी पढ़ें: रात 12 बजे या अगले दिन सूर्योदय के बाद, जन्माष्टमी व्रत का पारण कब किया जाता है? जान लें उपवास खोलने के नियम

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Festivals से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें धर्म