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Holashtak 2025: होलाष्टक क्या होता है? यह समय क्यों माना जाता है अशुभ, जानें इस दौरान क्या नहीं करना चाहिए

 Written By: Astrologer Chirag Edited By: Vineeta Mandal
 Published : Mar 06, 2025 04:48 pm IST,  Updated : Mar 06, 2025 11:27 pm IST

Holashtak 2025: हिंदू धर्म में होलाष्टक को बहुत ही अशुभ समय माना जाता है। इस दौरान कई कार्यों को करना वर्जित होता है। तो आइए जानते हैं कि आखिर होलाष्टक होता क्या है और इसे क्यों अशुभ माना गया है।

होलाष्टक 2025- India TV Hindi
होलाष्टक 2025 Image Source : INDIA TV

Holashtak 2025 Date: होली से आठ दिन पहले ही फाल्गुन अष्टमी से अशुभ काल शुरू हो जाता है, जिसे होलाष्टक के नाम से जाना जाता है। होलाष्टक के दौरान कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है। ऐसी मान्यता है कि होलाष्टक में किया गया कोई भी शुभ काम सफल नहीं होता है, साथ ही आशीर्वाद भी व्यर्थ हो जाता है। इसके अलावा, इस अवधि को बीमारी, कष्ट वाला कहा जाता है। ज्योतिषी चिराग दारूवाला से जानिए कि होलाष्टक के दिनों को अशुभ क्यों माना जाता है? आइए इसके कारणों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

होलाष्टक क्या है?

शब्द 'होली' और 'अष्टक', जो होली से पहले के आठ दिनों को दर्शाते हैं, इन दोनों को मिलाकर 'होलाष्टक' शब्द बना है। धार्मिक परंपराओं में कहा गया है कि विवाह, समारोह, मुंडन (मुंडन समारोह), गृह प्रवेश आदि सहित सभी शुभ कार्यक्रमों का करना अशुभ है और इन आठ दिनों के दौरान इनको करने से बचना चाहिए। होलाष्टक के दौरान सभी ग्रह प्रतिकूल यानी कमजोर स्थिति में होते हैं, जिसकी वजह से अच्छे कार्यों का परिणाम नकारात्मक हो सकता है। होलाष्टक होली के आठ दिन पहले शुरू होता है और यह होलिका दहन की रात तक चलता है। यानी होलाष्टक का आरंभ फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होता है और समापन होलिका दहन के दिन होता है। इस साल होलाष्टक 7 मार्च  2025 से शुरू हो रहा है। वहीं होलिका दहन 13 मार्च को किया जाएगा।

होलाष्टक को क्यों माना जाता है अशुभ?

होलाष्टक के आठ दिन के दौरान, ज्योतिषीय दृष्टिकोण से यह समय ग्रहों की स्थिति और तिथियों के कारण अशुभ माना जाता है। इस दौरान विशेष रूप से मंगल और शनि जैसे ग्रहों की स्थिति के कारण नकारात्मक ऊर्जा का संचार होने की संभावना अधिक मानी जाती है। इसके परिणामस्वरूप कोई नया कार्य या शुभ कार्य करना ठीक नहीं समझा जाता। एक पुरानी मान्यता के अनुसार, होलाष्टक का संबंध राक्षसी शक्तियों से जुड़ा हुआ है। इस समय को असत्य और अंधकार का प्रतीक माना जाता है। होलाष्टक के आठ दिनों तक राक्षसों का वर्चस्व माना जाता है, जिससे यह समय घर में नकारात्मकता और अशांति का कारण बन सकता है। इसलिए इस समय कोई भी शुभ कार्य करने से बचा जाता है।

होलाष्टक के दौरान क्या न करें?

  • होलाष्टक में कोई भी नया काम या शुभ कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।
  • होलाष्टक के दौरान गृह प्रवेश, विवाह, सगाई नया व्यवसाय शुरू, मुंडन नामकरण करना आदि नहीं करना चाहिए। 
  • होलाष्टक के समय सोना, चांदी, संपत्ति और वाहन नहीं खरीदना चाहिए
  • होलाष्टक में अशुद्ध या तामसिक भोजन से बचना चाहिए। मांसाहारी भोजन, शराब या अशुद्ध पदार्थों का सेवन न करें।

(ज्योतिषी चिराग दारूवाला विशेषज्ञ ज्योतिषी बेजान दारूवाला के पुत्र हैं। उन्हें प्रेम, वित्त, करियर, स्वास्थ्य और व्यवसाय पर विस्तृत ज्योतिषीय भविष्यवाणियों के लिए जाना जाता है।)

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