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जन्माष्टमी पर पीरियड्स आ जाएं तो व्रत रखना सही है या नहीं? जानिए मासिक धर्म में पूजा और उपवास के नियम

 Written By: Arti Azad
 Published : Sep 03, 2026 06:33 pm IST,  Updated : Sep 03, 2026 06:44 pm IST

4 सितंबर को जन्माष्टमी है। ऐसे में महिलाओं के मन में पीरियड्स को लेकर कुछ सवाल होंगे। जन्माष्टमी पर मासिक धर्म शुरू हो जाए तो क्या व्रत रखा जा सकता है? पूजा कैसे करें और लड्डू गोपाल के भोग की व्यवस्था कैसे करें? जानिए पीरियड्स में जन्माष्टमी व्रत और पूजा से जुड़े नियम।

Janmashtami vrat during periods- India TV Hindi
पीरियड्स में जन्माष्टमी व्रत और पूजा से जुड़े नियम Image Source : PEXELS

जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा और व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। देश के मंदिरों समेत सभी हिंदू परिवारों में इस पर्व की जोर-शोर से तैयारियां चल रही होंगी। लेकिन वे महिलाएं थोड़ी परेशान होंगी, जिनका मासिक धर्म आने वाले होगा। अगर इसी दिन या व्रत के दौरान पीरियड्स शुरू हो जाएं तो महिलाओं के मन में सवाल उठता है कि व्रत जारी रखें या नहीं और पूजा किस तरह करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसी स्थिति में भी कृष्ण भक्ति की जा सकती है, लेकिन कुछ नियमों का ध्यान रखना जरूरी माना गया है। चलिए जानते हैं पीरियड्स के दौरान व्रत और पूजा से जुड़े नियम क्या हैं। 

व्रत रखने की नहीं है मनाही

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन निशिता काल में लड्डू गोपाल की विशेष पूजा करते हैं। अगर जन्माष्टमी के दिन पीरियड्स शुरू हो जाएं, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत को बीच में तोड़ना जरूरी नहीं। यदि सेहत साथ दे तो उपवास जारी रखें। हालांकि, कमजोरी या तबीयत खराब होने पर व्रत जारी रखने की जिद नहीं करनी चाहिए।

ऐसे लें व्रत का संकल्प

पीरियड्स के दौरान व्रती सुबह उठकर बिना पूजा घर को स्पर्श किए मन ही मन व्रत का संकल्प ले सकती हैं। ऐसे में आंखें बंद करके भगवान कृष्ण के जन्म और उनके अभिषेक की कल्पना करते हुए श्रद्धापूर्वक संकल्प लिया जा सकता है।

पूजा से रखें दूरी

मासिक धर्म के दौरान पूजा को लेकर अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं हैं। कुछ जगह इस दौरान लड्डू गोपाल की मूर्ति, तुलसी और पूजा सामग्री को सीधे स्पर्श करने से बचने की बात कही गई है। ऐसे में परिवार के किसी सदस्य से पूजा, अभिषेक और भोग की व्यवस्था कराई जा सकती है। व्रती पूजा स्थान से थोड़ी दूर बैठकर भगवान कृष्ण का स्मरण और मानसिक पूजा कर सकती हैं।

मंत्र और कथा सुनें

पूजा सामग्री को स्पर्श न करने की स्थिति में भी कृष्ण भक्ति की जा सकती है। व्रती दूर बैठकर "ओम नमो भगवते वासुदेवाय" या "हरे कृष्ण" महामंत्र का मानसिक जाप कर सकती हैं। साथ ही श्रीकृष्ण जन्म की कथा, भगवद्गीता के श्लोक और भजन सुनकर भी भगवान का स्मरण किया जा सकता है।

भोग खुद न बनाएं

धार्मिक मान्यता के अनुसार, पीरियड्स के दौरान पूजा के लिए भोग और प्रसाद तैयार करने से भी बचना चाहिए। ऐसे में पंजीरी, माखन मिश्री और अन्य प्रसाद परिवार के किसी सदस्य से बनवाया जा सकता है। इसी तरह तुलसी की माला या जप माला को स्पर्श न करने की मान्यता है।

स्नान के बाद बनाएं प्रसाद

वहीं, अगर मासिक धर्म के पांच दिन पूरे हो चुके हों और पीरियड्स पूरी तरह रुक गए हों, तो दिए गए स्नान के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। इसके बाद रसोई को शुद्ध करके लड्डू गोपाल के लिए भोग-प्रसाद तैयार किया जा सकता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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