1. Hindi News
  2. धर्म
  3. त्योहार
  4. कोजागरी पूजा 25 या 26 अक्टूबर को? नोट कर लें सही तारीख, निशिता मुहूर्त और मां लक्ष्मी की पूजा विधि

कोजागरी पूजा 25 या 26 अक्टूबर को? नोट कर लें सही तारीख, निशिता मुहूर्त और मां लक्ष्मी की पूजा विधि

 Written By: Arti Azad
 Published : Oct 21, 2026 10:07 pm IST,  Updated : Oct 21, 2026 10:07 pm IST

शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। इस साल कोजागरी पूजा की तारीख को लेकर उलझन है। यहां जानें कोजागरी पूजा की सही तारीख, निशिता काल का समय और धार्मिक महत्व। इसके साथ ही मां लक्ष्मी की आराधना की आसान विधि भी जानिए।

Kojagari Purnima Puja Vidhi, कोजागरी पूजा 2026- India TV Hindi
कोजागरी पूजा 2026 Image Source : PINTEREST

शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी की आराधना के लिए विशेष मानी जाती है। इस दिन कोजागरी पूजा की जाती है, जिसमें भक्त रातभर जागकर माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि साल 2026 में कोजागरी पूजा कब मनाई जाएगी 25 और 26 अक्टूबर को? पूजा के लिए शुभ मुहूर्त और विधि भी जानिए।

2026 में कब है कोजागरी पूजा?

इस साल कोजागरी पूजा 25 अक्टूबर 2026, रविवार को मनाई जाएगी। इसे कोजागरी पूर्णिमा को बंगाली लक्ष्मी पूजा के नाम से भी जाना जाता है। रात में जागकर मां लक्ष्मी की पूजा करने की परंपरा के कारण इसे कोजागरी व्रत कहा जाता है। बंगाल में यह पर्व विशेष रूप से लोकप्रिय है। इस दिन कुछ चीजों का दान बेहद शुभ माना जाता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, कोजागरी पूजा के लिए पूर्णिमा तिथि और रात के शुभ समय का विशेष महत्व है। इस साल पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर शुरू होगी और 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 41 मिनट पर समाप्त होगी। पूजा का निशिता काल 25 अक्टूबर की रात 11 बजकर 40 मिनट से 26 अक्टूबर की देर रात 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।

कोजागरी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और देखती हैं कि कौन जागकर उनकी आराधना कर रहा है। 'को जागर्ति' का अर्थ है 'कौन जाग रहा है'। इसी शब्द से कोजागरी नाम की व्याख्या की जाती है। मान्यता है कि इस रात श्रद्धा पूर्वक पूजा और जागरण करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। 

कोजागरी पर ऐसे करें मां लक्ष्मी की पूजा

कोजागरी पूजा के दिन सबसे पहले घर और पूजा स्थल की सफाई करें। मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं और रंगोली बनाएं। रात में मां लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पूजा करें। इसके बाद अष्टलक्ष्मी का पूजन करें और श्रीसूक्त या लक्ष्मी चालीसा का पाठ कर सकते हैं। देवी को खीर, फल, मिठाई और सात्विक पकवान अर्पित करें।

खीर का भोग

शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की चांदनी और खीर का विशेष महत्व माना जाता है। कई परिवारों में खीर को स्वच्छ पात्र में रखकर रातभर चांदनी में रखने की परंपरा है। अगले दिन इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। श्रद्धालु रात में भजन-कीर्तन, मंत्र जाप और जागरण करके मां लक्ष्मी की आराधना करते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

ये भी पढ़ें: शुक्रादित्य योग से 3 राशियों की चमकेगी किस्मत, 6 नवंबर तक करियर में तरक्की और धन लाभ के योग

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Festivals से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें धर्म।